RBI की नीतियाँ और मुद्रास्फीति (Inflation) पर दृष्टिकोण
📉 मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में कटौती
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जून में मुद्रास्फीति घटकर 2.1% हो गई है, जो कि RBI के 4% लक्ष्य से काफी नीचे है।
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अप्रैल में यह 3.16% रही, जो कि 69 महीनों में सबसे कम है।
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लेकिन फिलहाल ब्याज दरों में और कटौती नहीं की जाएगी — RBI मौजूदा आंकड़ों की बजाय आगामी आर्थिक परिदृश्य को देखकर निर्णय लेगा।
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CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) की Q4 में 4.4% रहने की संभावना है, पर अब इसमें गिरावट का संशोधन हो सकता है।
💸 ब्याज दरें और ऋण वृद्धि
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2025 में RBI ने अब तक अपनी नीतिगत दरों में 1% की कटौती की है।
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बैंकों की ऋण दरें 0.50% तक गिरी हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि RBI के फैसले का पूरा प्रभाव पड़ा है।
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ये कटौती ऋण (क्रेडिट) वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए की गई हैं, बिना कोई एसेट बबल बनाए।
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FY25 में क्रेडिट ग्रोथ 12.1% रही, जो कि पिछले 10 वर्षों के औसत 10% से बेहतर है।
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लेकिन FY26 में यह गिरकर 9% के आस-पास है।
🧰 RBI के पास और विकल्प मौजूद हैं
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RBI के पास रेपो रेट कटौती के अलावा और भी टूल्स हैं — लेकिन विस्तार से नहीं बताया गया।
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CRR (कैश रिज़र्व रेशियो) को 3% किया गया है — यह केवल तरलता (liquidity) नहीं, बल्कि उधारी की लागत कम करने के लिए भी है।
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COVID काल में RBI ने सिर्फ 1% CRR का उपयोग किया — यानी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।
🧾 नियामकीय सुधार और वित्तीय समावेशन
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RBI अब अपने 8,000 से अधिक नियमों को 33 मास्टर रेगुलेशन में समाहित करने की योजना पर काम कर रहा है।
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एक नियामक पुनरावलोकन प्रकोष्ठ (Regulatory Review Cell) बनेगा, जो हर 5–7 साल में नियमों की समीक्षा करेगा।
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बैंक अधिकारी अब देश के 2.7 लाख पंचायतों में साप्ताहिक दौरा कर रहे हैं:
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वित्तीय समावेशन बढ़ाने,
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स्थानीय समस्याएं समझने और
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KYC अपडेट करने के लिए।
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⚖️ औद्योगिक घरानों द्वारा बैंक खोलने पर चिंता
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RBI ने फिर दोहराया कि औद्योगिक घरानों को बैंक प्रमोट करने की अनुमति देना प्रणाली को संघर्ष की स्थिति में डाल सकता है।
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मताधिकार (voting rights) 26% तक सीमित हैं, लेकिन विदेशी बैंक 100% हिस्सेदारी ले सकते हैं।
💰 भुगतान प्रणाली और सरकारी समर्थन
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सरकार फिलहाल पेमेण्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को सब्सिडी दे रही है।
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भविष्य में, यह खर्च राज्य या उपयोगकर्ताओं को उठाना पड़ सकता है।
🏦 गवर्नर का मुख्य कथन
“मौद्रिक नीति में असर दिखने में समय लगता है। हम केवल वर्तमान नहीं, बल्कि आगामी 12 महीनों के लिए महंगाई और विकास की स्थिति देखकर दरों पर निर्णय लेते हैं।”
— संजय मल्होत्रा, RBI गवर्नर
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