Saturday, August 16, 2025

भारत को अपने व्यापार संबंधों और रणनीतियों पर नए सिरे से सोचने की ज़रूरत है

 

भारत को अपने व्यापार संबंधों और रणनीतियों पर नए सिरे से सोचने की ज़रूरत है

✍️ By Suryavanshi IAS


प्रस्तावना

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक चौराहे पर खड़ी है। 7 अगस्त 2025 को अमेरिका ने भारतीय समुद्री खाद्य (Seafood) निर्यात पर 25% टैरिफ लगा दिया है, और 27 अगस्त तक इसे 50% तक बढ़ाने की धमकी दी है। यह कदम करोड़ों भारतीयों को प्रभावित करता है — केवल सीफूड उद्योग ही लगभग 2.8 करोड़ लोगों को रोज़गार देता है, जबकि वस्त्र और मत्स्य पालन क्षेत्र मिलकर 13.5 करोड़ लोगों की आजीविका का आधार हैं।

यह घटना भारत के नीति-निर्माताओं और UPSC के छात्रों के लिए एक बड़ा प्रश्न खड़ा करती है — वैश्विक संरक्षणवाद (Protectionism), भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और मंद पड़ती वैश्वीकरण की लहरों के बीच भारत को अपने व्यापारिक रिश्तों और रणनीतियों को किस प्रकार ढालना चाहिए?


अमेरिका के टैरिफ की चुनौती

  • अमेरिका का महत्व → भारत के परिधान और सीफूड निर्यात का लगभग 1/3 भाग अमेरिका को जाता है।

  • MSME की नाज़ुक स्थिति → MSME भारत के कुल निर्यात में 45.79% (FY25) योगदान देते हैं और लगभग 28 करोड़ लोगों को रोज़गार देते हैं।

  • प्रभावित सेक्टर:

    • सीफूड उद्योग → 240 दिन का ऋण-भुगतान स्थगन (Moratorium) मांग रहा है।

    • वस्त्र, रत्न व आभूषण → ब्याज सहायता (Interest Subvention) चाहते हैं।

  • सरकार की स्थिति → प्रत्यक्ष सब्सिडी से इंकार, लेकिन Export Promotion Mission (₹2250 करोड़, FY25) में बदलाव पर विचार।


भू-राजनीतिक पहलू

  • मोदी–ट्रम्प समीकरणों के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार वार्ता ठप

  • आज के घनिष्ठ आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक संबंधों के बावजूद रिश्ते शीत युद्ध काल से भी नीचे माने जा रहे हैं।

  • अप्रैल 2025 में अमेरिका ने “प्रतिशोधी टैरिफ” (Reciprocal Tariffs) की घोषणा की।

  • सबक → किसी एक महाशक्ति पर अत्यधिक निर्भरता भारत के लिए रणनीतिक कमज़ोरी है।


विविधीकरण की आवश्यकता

1. क्षेत्रीय व पड़ोसी व्यापार

  • चीन, ASEAN, SAARC पड़ोसी देशों से व्यापारिक रिश्तों को नया रूप देना।

  • चीन प्रतिस्पर्धी होने के बावजूद वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

2. नए निर्यात रणनीति

  • EPM को मज़बूत बनाना — इसमें वस्त्र व मत्स्य मंत्रालय को शामिल करना।

  • सस्ता निर्यात ऋण व भुगतान बीमा (Export Credit & Insurance)।

  • MSMEs को अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, पश्चिम एशिया में नए बाजारों में प्रवेश के लिए प्रोत्साहन।

3. वैश्विक अनुभव से सीख

  • यूरोपीय संघ की रूसी तेल पर निर्भरता, तथा दुनिया की चीन पर Rare Earth Elements की निर्भरता दिखाती है कि सप्लाई चेन को तुरंत बदला नहीं जा सकता।

  • भारत को धीरे-धीरे विविधीकरण + आत्मनिर्भरता दोनों की दिशा में बढ़ना होगा।


नीति निर्माताओं के लिए आगे की राह

  • अल्पकालिक: ऋण-भुगतान स्थगन, सस्ता निर्यात ऋण, लक्षित ब्याज सहायता (WTO नियमों का उल्लंघन किए बिना)।

  • मध्यमकालिक: ASEAN, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका के साथ नए व्यापारिक रिश्ते।

  • दीर्घकालिक: अमेरिका पर निर्भरता घटाना, Make in India, PLI योजनाएँ और आत्मनिर्भर भारत को मज़बूत बनाना।


UPSC में प्रासंगिकता

यह मुद्दा GS Paper II (IR), GS Paper III (अर्थव्यवस्था) और निबंध पत्र में सीधे रूप से उपयोगी है।

महत्वपूर्ण PYQs

GS Paper III

  1. विश्व व्यापार में संरक्षणवाद (Protectionism) और एकतरफ़ावाद (Unilateralism) की प्रवृत्ति भारत के आर्थिक हितों को कैसे प्रभावित करेगी? (UPSC 2018)

  2. WTO को यदि वर्तमान 'Trade War' के दौर में जीवित रहना है तो उसमें क्या सुधार आवश्यक हैं, विशेष रूप से भारत के हितों को देखते हुए? (UPSC 2018)

  3. अमेरिका द्वारा TPP से बाहर निकलने का भारत की व्यापारिक रणनीति पर क्या प्रभाव पड़ा है? (UPSC 2017)

  4. MSME क्षेत्र भारत के निर्यात की रीढ़ है। वैश्विक व्यापार में इसकी चुनौतियों का उल्लेख कीजिए और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उपाय सुझाइए। (UPSC 2020 ट्रेंड पर आधारित)

GS Paper II
5. “समकालीन भू-अर्थशास्त्र (Geo-Economics) के परिप्रेक्ष्य में भारत को अपनी व्यापार नीति को अमेरिका और चीन दोनों के साथ संतुलित कर पुनः निर्धारित करना चाहिए।” समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (Model Q)


निष्कर्ष

भारत अब व्यापार नीति में आत्मसंतोष का जोखिम नहीं उठा सकता। अमेरिका द्वारा सीफूड और वस्त्रों पर लगाए गए टैरिफ केवल आर्थिक चुनौती नहीं बल्कि रणनीतिक चेतावनी हैं। भारत को बाज़ारों का विविधीकरण करना होगा, MSMEs को सशक्त बनाना होगा, और चीन समेत पड़ोसियों से संतुलित व्यापारिक रिश्ते बनाने होंगे। साथ ही घरेलू निर्माण (Manufacturing) व आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत कर “निर्यात-प्रधान विकास” को आगे बढ़ाना होगा।

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