Thursday, July 24, 2025

स्वच्छ सर्वेक्षण 2025: शहरों में स्वच्छता नहीं, बदलाव का संकेत है

 

स्वच्छ सर्वेक्षण 2025: शहरों में स्वच्छता नहीं, बदलाव का संकेत है

— Suryavanshi IAS द्वारा


📌 “स्वच्छता कोई अभियान नहीं, यह एक संस्कृति है — जो व्यवहार में दिखे, नीति से संचालित हो और नागरिकों के जीवन को प्रभावित करे।”


🏙️ स्वच्छता की रैंकिंग नहीं, यथार्थ का आईना है स्वच्छ सर्वेक्षण

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत आयोजित स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 सिर्फ रैंकिंग भर नहीं है, यह भारत के शहरों में हो रहे वास्तविक परिवर्तन की झलक है:

  • 4500+ शहर भागीदार (2016 में केवल 100 से कम)

  • 14 करोड़ नागरिकों का फीडबैक — जनभागीदारी की ताकत

  • सर्वेक्षण में 10 प्रमुख मापदंड — जैसे कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रबंधन, सफाई कर्मचारियों की स्थिति, शिकायत निवारण आदि

🔍 अब यह केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि शहरी नीतियों की समीक्षा और नागरिक संतोष का पैमाना बन गया है।


🧑‍🤝‍🧑 सुपर स्वच्छ लीग: बड़े शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा

इस वर्ष शुरू हुई सुपर स्वच्छ लीग ने शीर्ष पर वर्षों से जमे शहरों — इंदौर, सूरत, नवी मुंबई — को नई लीग में रखा, जिससे नई शहरों को उभरने का अवसर मिला:

  • अब शहरों को 5 जनसंख्या श्रेणियों में बाँटा गया, जिससे तुलना अधिक न्यायसंगत बनी

  • अहमदाबाद, भोपाल, लखनऊ जैसे नए नाम शीर्ष पर

  • ओडिशा की बड़ी छलांग — भुवनेश्वर 34वें से 9वें स्थान पर, आसका व चिकिटी जैसे छोटे शहर अपनी श्रेणी में शीर्ष पर

💡 यह दिखाता है कि अब स्वच्छता किसी विशेष राज्य की जागीर नहीं — सभी के लिए अवसर है।


🌍 क्षेत्रीय असमानता और सुधार की गुंजाइश

  • दक्षिण भारत अभी भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया — हैदराबाद, तिरुपति, विजयवाड़ा, मैसूरु कुछ बेहतर नाम

  • एनसीआर क्षेत्र में नई दिल्ली नगर परिषद और नोएडा अव्वल, जबकि गुरुग्राम, गाजियाबाद, दिल्ली की रैंकिंग में सुधार

📌 सर्वेक्षण में हर राज्य से एक प्रेरणादायक शहर चुना गया, जिससे राज्य-स्तरीय अच्छे अभ्यास साझा हो सकें।


♻️ शहरों की प्रेरक कहानियां: कचरे से कंचन तक

शहरनवाचार
इंदौर6 प्रकार का कचरा पृथक्करण (सूखा, गीला, प्लास्टिक, ई-वेस्ट आदि)
सूरतगंदे पानी को ट्रीट कर बेचने से राजस्व
पुणेकचरा प्रबंधन में रैगपिकर सहकारी समितियों की भूमिका
विशाखापट्टनमपुराने कचरा स्थल को इको-पार्क में बदला
लखनऊवेस्ट वंडर पार्क (कचरे से बने स्मारक)
आगरा (कुबेरपुर)जहरीला कचरा स्थल अब 47 एकड़ का हरा क्षेत्र

🧳 पर्यटन और स्वच्छता: अवसर और चुनौती

  • प्रयागराज को गंगा शहर श्रेणी में सम्मान मिला

  • महाकुंभ में बेहतर स्वच्छता प्रबंधन की सराहना हुई

  • पर भारत में केवल 1.5% अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आते हैं

🌆 सिर्फ पर्वों पर सफाई नहीं, निरंतर स्वच्छता ही पर्यटन को बढ़ा सकती है।


🔁 थीम 2025: RRR यानी Reduce, Reuse, Recycle

पिछली बार की थीम थी "Waste to Wealth", इस बार RRR ने नई दिशा दी:

  1. आदत में बदलाव – उपभोगवाद के विरुद्ध चेतना

  2. रोजगार सृजन – स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से

  3. पर्यावरणीय पुनर्जीवन – कचरे की मात्रा में कमी

हालांकि, अभी भी नागरिक सहभागिता सीमित है और निजी क्षेत्र निवेश को लेकर अनिश्चित है।


🚛 शहरी निकायों (ULBs) की भूमिका: स्वच्छता वहीं तय होती है

भारत में हर दिन 1.5 लाख टन ठोस कचरा निकलता है। इसे मैनेज करने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों पर है:

  • घर से ही कचरे का पृथक्करण अनिवार्य

  • प्लास्टिक और ई-वेस्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन

  • कलेक्शन, ट्रांसपोर्ट और प्रोसेसिंग में पारदर्शिता

  • सफाई कर्मचारियों के अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित करना


🧭 UPSC के लिए प्रमुख बिंदु

📘 GS Paper II – शासन:

  • SBM-Urban की भूमिका

  • शहरी शासन में नागरिक भागीदारी

  • ULBs की शक्तियों का विकेंद्रीकरण

📘 GS Paper III – पर्यावरण:

  • ठोस कचरा प्रबंधन

  • RRR मॉडल और सर्कुलर इकोनॉमी

  • Waste to Energy परियोजनाएं

📝 निबंध विषय:

  • “साफ़ शहर, सशक्त राष्ट्र”

  • “स्वच्छता: संस्कृति नहीं, संवैधानिक कर्तव्य बननी चाहिए”


🔚 निष्कर्ष: रैंकिंग से आगे बढ़ें, संस्कृति बनाएं

सूरत, जो कभी कचरे और प्लेग के लिए बदनाम था, आज स्वच्छता में अग्रणी है।

यही भारत की परिवर्तनशील शक्ति है।
स्वच्छता अब महज़ कार्यक्रम नहीं, यह शहरों के भविष्य का सूचक बन चुकी है। इसे व्यवस्था, नागरिक चेतना और स्थानीय शासन के सहयोग से साकार करना होगा।


📌 ऐसे ही सुधारवादी दृष्टिकोण के लिए जुड़े रहें — Suryavanshi IAS के साथ।

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