मोहनदास करमचंद गांधी: जन्म से कानून की पढ़ाई तक
🟡 जन्म और प्रारंभिक जीवन:
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महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर (काठियावाड़, गुजरात) में हुआ था।
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उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे।
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माता पुतलीबाई धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं और जैन-हिंदू परंपराओं से प्रभावित थीं।
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गांधीजी ने अपने जीवन के प्रारंभिक संस्कारों में सत्य, अहिंसा, आत्मसंयम और सादगी को विशेष महत्व देना शुरू किया।
🟡 शिक्षा की शुरुआत:
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प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और राजकोट में हुई।
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वे एक सामान्य छात्र थे, परंतु ईमानदारी और अनुशासन के लिए पहचाने जाते थे।
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उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा 1887 में अहमदाबाद से उत्तीर्ण की और भावनगर के संमिलित कला महाविद्यालय (Samaldas College) में दाखिला लिया।
🟡 विदेश में अध्ययन:
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गांधीजी के परिवार और समाज में विदेश यात्रा को अच्छा नहीं माना जाता था, परंतु उन्होंने यह कदम कानून की पढ़ाई के लिए उठाया।
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4 सितंबर 1888 को गांधीजी इंग्लैंड के लिए रवाना हुए।
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उन्होंने लंदन के Inner Temple (इनर टेम्पल) से कानून की पढ़ाई की।
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इस दौरान उन्होंने पश्चात्य सभ्यता, विचारधारा और जीवनशैली को नजदीक से देखा, लेकिन भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहे।
🟡 लंदन में उनके अनुभव:
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गांधीजी ने शाकाहार, आत्म-नियंत्रण, और नैतिकता पर गहन अध्ययन किया।
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उन्होंने Theosophical Society के कुछ सदस्यों से संपर्क में आकर भगवद्गीता और अन्य धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया।
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उन्होंने अपने जीवन को नैतिक शुद्धता और सत्य के प्रयोग के रास्ते पर ढालना शुरू कर दिया।
🟡 कानून की डिग्री:
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गांधीजी ने 1891 में इंग्लैंड से बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त की और भारत लौट आए।
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भारत आकर उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत शुरू की, परंतु उन्हें प्रारंभ में विशेष सफलता नहीं मिली।
निष्कर्ष:
महात्मा गांधी का जन्म और आरंभिक जीवन उनके नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की नींव बना। इंग्लैंड में उनकी शिक्षा ने उन्हें एक वैश्विक दृष्टिकोण दिया, परंतु उन्होंने भारतीयता को नहीं छोड़ा। सत्य, संयम और सेवा की भावना उनके व्यक्तित्व की पहचान बन गई — जो आगे चलकर उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का नैतिक नेतृत्व सौंपेगी।
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