दोषपूर्ण मतदाता सूची: चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की साझा विफलता | लोकतंत्र पर प्रश्न
प्रासंगिकता: जीएस- II (संवैधानिक निकाय - चुनाव आयोग, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम); राजनीतिक दलों की भूमिका
चर्चा में क्यों?
मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर असमानताओं—जैसे गलत विवरण, नकली प्रविष्टियाँ, और "भूत मतदाता"—की रिपोर्टों ने भारत की चुनाव प्रक्रिया की अखंडता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जहाँ प्राथमिक जिम्मेदारी भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) की है, वहीं एक गहन विश्लेषण इस संस्थागत क्षय में राजनीतिक दलों की significant भूमिका को भी उजागर करता है, जिससे प्रतिनिधिक लोकतंत्र में जनता का विश्वास कम हो रहा है।
मुख्य संरक्षक: ECI का गिरता विश्वास
निर्वाचन आयोग का संवैधानिक दायित्व (अनुच्छेद 324) चुनावों का पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करना है। इसमें सटीक और स्वच्छ मतदाता सूचियाँ बनाए रखना शामिल है।
टी.एन. शेषन का योगदान: 1990 के दशक में, मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के कार्यकाल में, ECI एक शक्तिशाली, विश्वसनीय नियामक बनकर उभरा। इसने आदर्श चुनाव संहिता (Model Code of Conduct) को लागू किया, चुनाव खर्च की निगरानी की, और जाली मतदान रोकने के लिए मतदाता पहचान पत्र (EPIC) की शुरुआत की।
विश्वसनीयता का क्षरण: हाल में, ECI की पारदर्शिता की कमी और विसंगतियों को प्रोएक्टिव तरीके से हल न करने के लिए आलोचना हुई है। जांच से बचने के प्रयासों ने उल्टा उसकी संस्थागत अखंडता और तटस्थता पर संदेह पैदा कर दिया है।
मौजूदा प्रणाली: ECI की मैनुअल में एक मजबूत system है:
निर्वाचन पंजीयन अधिकारी (ERO) और बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) जमीनी स्तर पर काम करते हैं।
बूथ लेवल एजेंट (BLA): राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि होते हैं जिनका काम ड्राफ्ट सूचियों की जांच करना और सुधार में सहायता करना है। नियम धोखाधड़ी वाले बल्क एंट्री को रोकने के लिए उनके आवेदनों की संख्या सीमित करते हैं।
राजनीतिक दलों की भूमिका: मूक सहयोगी
जहाँ ECI की भूमिका सीधी है, वहीं राजनीतिक दलों ने अपने लोकतांत्रिक कार्यों को नज़रअंदाज़ करके इस क्षय को अप्रत्यक्ष रूप से enable किया है।
1. जमीनी स्तर की राजनीति से पीछे हटना:
डिजिटल अभियानों पर जोर: पारंपरिक, श्रम-केंद्रित ग्रासरूट्स कैंपेनिंग (घर-घर जाकर मिलना, स्थानीय सभाएं) का स्थान सोशल मीडिया, AI चैटबॉट्स और केंद्रीकृत डिजिटल संचार ले रहा है।
पेशेवर सलाहकारों का उदय: दल अब डेटा विश्लेषकों और रणनीतिकारों पर निर्भर हैं, जो एक ऊपर-से-नीचे (top-down) approach के साथ काम करते हैं और स्थानीय कार्यकर्ताओं को sidelined कर देते हैं, जो कभी जमीन पर पार्टी की आँखें और कान हुआ करते थे।
परिणाम: इससे दलों के भीतर सत्ता का केंद्रीकरण हुआ है और स्थानीय संगठनात्मक संरचनाओं का गंभीर रूप से कमजोर होना हुआ है। एक निष्क्रिय स्थानीय इकाई मतदाता सूचियों की जांच के अपने महत्वपूर्ण दायित्व को निभाने में असमर्थ है।
महत्वपूर्ण कड़ी: बूथ लेवल एजेंट (BLA)
BLA का mechanism पारदर्शिता सुनिश्चित करने की रीढ़ है।
भूमिका: BLA, दलों द्वारा BLOs के साथ मिलकर काम करने के लिए नियुक्त किए जाते हैं। वे micro-level पर पार्टी, मतदाताओं और ECI के बीच मुख्य कड़ी हैं।
सुरक्षा उपाय: ECI मैनुअल में अंतर्निहित जांचें हैं:
एक BLA प्रतिदिन केवल 10 आवेदन (जोड़ने/हटाने/सुधार के लिए) दाखिल कर सकता है।
यदि कोई BLA revision period में 30 से अधिक आवेदन जमा करता है, तो ERO को व्यक्तिगत रूप से उन्हें verify करना होगा।
एक ही परिवार के अलावा बल्क आवेदन वर्जित हैं।
विफलता: कर्नाटक के महादेवपुरा जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी असहज सवाल पूछने को मजबूर करती है:
क्या कुछ BLA, ECI की मिलीभगत से system के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे?
या फिर BLA simply अनुपस्थित थे—क्या यह दलों द्वारा अपनी स्थानीय इकाइयों की उपेक्षा का नतीजा है?
आगे का रास्ता: सुधार का अवसर
यह संकट एक मोड़ (course correction) का भी अवसर है।
राजनीतिक दलों के लिए:
जमीनी संगठनों को पुनर्जीवित करें: दलों को स्थानीय इकाइयों में पुनर्निवेश करना चाहिए, यह समझते हुए कि चुनावों के बीच का राजनीतिक कार्य (politics between elections) चुनाव自身 जितना ही महत्वपूर्ण है।
सजग भागीदारी: उन्हें revision process में diligently भाग लेना चाहिए, committed BLA नियुक्त करने चाहिए, और draft rolls की सूक्ष्मता से जांच करनी चाहिए। केरल में देखी गई नई सजगता एक सकारात्मक मॉडल है।
निर्वाचन आयोग के लिए:
पारदर्शिता अपनाएँ: ECI को opacity के बजाय proactive पारदर्शिता की अपनी विरासत पर लौटना चाहिए। उसे विसंगतियों को publicly संबोधित करना चाहिए और सूचियों का सख्ती से audit करना चाहिए।
निगरानी मजबूत करें: BLAs के लिए मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करें और duplicates और अशुद्धियों का पता लगाने के लिए technology (जैसे GIS mapping, AI-driven cross-verification) का use करें।
लोकतांत्रिक resilience के लिए:
संस्थागत अखंडता: सभी संस्थानों—ECI और दलों—को अल्पकालिक electoral लाभ पर दीर्घकालिक संवैधानिक मानदंडों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
नागरिक जागरूकता: मतदाताओं को ऑनलाइन अपना विवरण verify करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि वे एक स्वच्छ मतदाता सूची सुनिश्चित करने में active stakeholders बन सकें।
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) अभ्यास के लिए
कोई व्यक्ति जो मतदान का पात्र है, उसे छह महीने के लिए किसी राज्य में मंत्री बनाया जा सकता है, भले ही वह उस राज्य की विधानसभा का सदस्य न हो।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार, एक व्यक्ति जो किसी आपराधिक अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है और उसे पांच साल की कैद की सजा सुनाई गई है, उसे चुनाव लड़ने से स्थायी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।
निष्कर्ष
दोषपूर्ण मतदाता सूची एक गहरी बीमारी का लक्षण है: एक संवैधानिक निकाय और राजनीतिक दलों दोनों का संस्थागत क्षय। ECI की घटती विश्वसनीयता और दलों की अपनी जमीनी नींव की उपेक्षा ने सामूहिक रूप से चुनावी अखंडता को कमजोर किया है। एक मजबूत लोकतंत्र के लिए एक निष्पक्ष रेफरी और सजग खिलाड़ियों दोनों की आवश्यकता होती है। मरम्मत तभी शुरू हो सकती है जब दोनों इस क्षय में अपनी भूमिका स्वीकार करें और मतदाता सूची की पवित्रता—प्रतिनिधिक लोकतंत्र की बुनियाद—को बहाल करने के लिए collaborative रूप से काम करें।
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