Friday, August 8, 2025

जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की सलाहकार राय: UPSC अभ्यर्थियों के लिए विस्तृत विश्लेषण

 जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की सलाहकार राय: UPSC अभ्यर्थियों के लिए विस्तृत विश्लेषण

प्रस्तावना:
हाल ही में, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अस्तित्वगत संकट को ध्यान में रखते हुए, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice - ICJ) ने राज्यों के जलवायु परिवर्तन से संबंधित दायित्वों पर एक ऐतिहासिक सलाहकार राय (Advisory Opinion) दी है। यह राय भले ही बाध्यकारी न हो, परंतु इसे अंतरराष्ट्रीय कानून की अधिकृत व्याख्या के रूप में देखा जाता है और यह वैश्विक नीति-निर्माण को प्रभावित करती है।


UPSC GS-II व GS-III से संबंधित विषय:

  • अंतरराष्ट्रीय संस्थान और उनके आदेश (GS-II)

  • पर्यावरण और पारिस्थितिकीय मुद्दे (GS-III)

  • पर्यावरणीय न्याय, जलवायु न्याय, सतत विकास (GS-III)

  • भारत और वैश्विक पर्यावरणीय नीति (GS-II/III)


मुख्य बिंदु:

1. जलवायु परिवर्तन पर ICJ की ऐतिहासिक राय:

  • ICJ ने यह स्पष्ट किया कि जलवायु प्रणाली की रक्षा करना राज्यों की कानूनी जिम्मेदारी है।

  • संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC), क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते को एकीकृत रूप में समझा गया।

  • वैज्ञानिक सर्वसम्मति के आधार पर, 1.5°C को वह सीमा माना गया जिसे पार न करने की दिशा में प्रयास होना चाहिए।

2. Nationally Determined Contributions (NDCs) की बाध्यता:

  • पेरिस समझौते में NDC को "highest possible ambition" के सिद्धांत के अनुसार बनाना आवश्यक बताया गया।

  • इसका उल्लंघन कानूनी उत्तरदायित्व उत्पन्न करता है।

3. उत्तर-दक्षिण विभाजन और जलवायु न्याय:

  • "Common But Differentiated Responsibilities" (CBDR-RC) को मान्यता।

  • विकसित देशों को विकासशील देशों को वित्तीय सहायता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण देना कानूनी दायित्व।

4. मानव अधिकार और पर्यावरणीय संरक्षण:

  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव विशेषकर वंचित समुदायों के मानवाधिकारों पर पड़ता है।

  • जलवायु नीतियों में मानवाधिकारों को ध्यान में रखना अनिवार्य।

5. संप्रभुता बनाम वैश्विक दायित्व:

  • कुछ देशों (जैसे भारत) द्वारा दी गई "Self-contained regime" की दलील को ICJ ने खारिज किया।

  • सामान्य अंतरराष्ट्रीय कानून और पर्यावरणीय कानून भी लागू होते हैं।


Global South के लिए लाभ:

  • छोटे द्वीपीय देशों की पहल पर यह राय UNGA ने ICJ से मांगी थी।

  • यह निर्णय उन देशों के लिए कानूनी हथियार बन सकता है जो जलवायु संकट के सबसे बड़े शिकार हैं।

  • यह निर्णय रणनीतिक मुकदमों (Strategic Litigation) को बल देगा, जैसे भारत में सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिद्धिमा पांडे केस।


UPSC Prelims & Mains में प्रासंगिकता:

Prelims (Last 8 years – Key Questions)

  • 2023: UNFCCC, Paris Agreement और CBDR पर आधारित प्रश्न

  • 2021: Climate justice और human rights पर प्रश्न

  • 2020: Nationally Determined Contributions से संबंधित प्रश्न

  • 2018: IPCC रिपोर्ट और वैश्विक तापमान लक्ष्यों पर प्रश्न

Mains (GS-II/III) में संभावित प्रश्न:

  1. जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की सलाहकार राय का वैश्विक पर्यावरणीय प्रशासन पर प्रभाव समझाइए।

  2. Common but Differentiated Responsibilities के सिद्धांत की प्रासंगिकता वर्तमान वैश्विक संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

  3. वैश्विक उत्तर-दक्षिण विभाजन और भारत की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  4. जलवायु परिवर्तन और मानवाधिकारों के आपसी संबंध को स्पष्ट कीजिए।


निष्कर्ष: ICJ की यह सलाहकार राय जलवायु न्याय को एक नई गति देती है और यह सुनिश्चित करती है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक कानूनी और नैतिक दायित्व है। UPSC अभ्यर्थियों को इसे गहराई से समझकर अपने उत्तरों में इन कानूनी आयामों को शामिल करना चाहिए।


UPSC रणनीति टिप:

  • ICJ, ITLOS, Paris Agreement जैसे संस्थानों और संधियों के कानूनी प्रावधानों की व्याख्या करें।

  • Mains में उत्तर लिखते समय मानवाधिकार, जलवायु न्याय और दायित्वों की भाषा अपनाएं।

  • केस स्टडी के रूप में रिद्धिमा पांडे केस या चागोस द्वीप केस को जोड़ें।

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