Tuesday, June 2, 2026

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6): भारत के स्वास्थ्य परिदृश्य का विश्लेषणात्मक मूल्यांकन

 

1. परिचय (Introduction)

हाल ही में जारी वर्ष 2023-24 के NFHS-6 के आंकड़े भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अनूठा मोड़ प्रस्तुत करते हैं, जहां "सफलता और संकट" दोनों एक साथ खड़े हैं। जहां एक तरफ देश ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के मोर्चे पर दशकों के प्रयासों के बाद उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, वहीं दूसरी तरफ जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (NCDs) का एक नया संकट उभर रहा है। साक्ष्य-आधारित शासन (Evidence-based governance) और नीति निर्माण के लिए प्राथमिक उपकरण माना जाने वाला यह सर्वेक्षण भारत को अपनी स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को पुनर्गठित करने का अवसर देता है।

2. 'तुरुप का पत्ता' या सफलताएं (The Triumphs in Child & Maternal Health)

भारत ने बाल और मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया है, जो जमीनी स्तर पर सेवा वितरण (Service Delivery) की मजबूती को दर्शाता है:

  • कुपोषण में कमी: बच्चों में नाटापन (Stunting) 17% तक कम हुआ है, जबकि गंभीर रूप से कमजोर होने (Severe Wasting) की दर में 32% की भारी गिरावट आई है।

  • संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries): देश में सुरक्षित और अस्पतालों में होने वाले प्रसव की दर अब 90% से अधिक हो चुकी है।

  • टीकाकरण का दायरा: 12-23 महीने के बच्चों के लिए पूर्ण टीकाकरण कवरेज बढ़कर 87% से अधिक हो गया है।

  • जनसांख्यिकीय स्थिरता: भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) अब 2.0 पर स्थिर हो गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level - 2.1) से भी नीचे है। यह जनसंख्या स्थिरता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

3. उभरती हुई चुनौतियाँ (The Core Lacunae & Disasters)

इन जीतों के समानांतर, देश के सामने 'दोहरा सार्वजनिक स्वास्थ्य बोझ' (Dual Public Health Burden) खड़ा हो गया है, जहां पारंपरिक कुपोषण के साथ-साथ अति-पोषण और जीवनशैली जनित बीमारियां पैर पसार रही हैं:

  • मोटापे (Obesity) की महामारी: मात्र तीन वर्षों में पुरुषों में मोटापे की दर 22.9% से बढ़कर 27.3% और महिलाओं में 24% से बढ़कर 30.7% हो गई है।

  • स्तनपान में गिरावट: छह महीने से कम उम्र के बच्चों में विशेष स्तनपान (Exclusive Breastfeeding) की दर NFHS-5 के 63.7% से घटकर NFHS-6 में 55.8% रह गई है। यह गिरावट शिशु कुपोषण को रोकने के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका है।

  • गैर-संचारी रोगों (NCDs) का हमला: राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) और SRS के अन्य डेटा भी इसकी पुष्टि करते हैं कि देश में चयापचय संबंधी विकारों (Metabolic Disorders) और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर फंड और ध्यान दोनों की भारी कमी है।

4. नीतिगत निहितार्थ और आगे की राह (Policy Implications & Way Forward)

जैसे-जैसे भारत जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) से गुजरते हुए एक 'वृद्ध होते राष्ट्र' (Greyer Nation) की ओर बढ़ रहा है, इन चुनौतियों का समय पर समाधान न करना भविष्य के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। इसके लिए निम्नलिखित रणनीतिक बदलाव आवश्यक हैं:

┌────────────────────────────────────────┐
│ NFHS-6: स्वास्थ्य सुधार त्रिकोण │
└───────────────────┬────────────────────┘
┌───────────────────────────┼───────────────────────────┐
▼ ▼ ▼
┌───────────────────┐ ┌───────────────────┐ ┌───────────────────┐
│ व्यापक स्क्रीनिंग │ │ व्यवहार परिवर्तन │ │ राजकोषीय उपाय │
│ (Screening) │ │ (Diet & Exercise)│ │ (Sugar/Fat Tax) │
└───────────────────┘ └───────────────────┘ └───────────────────┘
  1. NCDs के लिए व्यापक स्क्रीनिंग: गैर-संचारी रोगों की शुरुआती पहचान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक और अनिवार्य स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए।

  2. व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC): आहार (Diet) और व्यायाम के महत्व को लेकर देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान चलाया जाना आवश्यक है, ताकि मोटापे की बढ़ती दर पर अंकुश लगाया जा सके।

  3. राजकोषीय नीतियां (Fiscal Measures): चीनी युक्त पेय पदार्थों (Sugared Beverages) और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर उच्च कर (Higher Taxes) लगाकर अस्वस्थ खान-पान की आदतों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।

  4. स्वास्थ्य प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण: ग्रामीण (गांव), कस्बों और शहरों के हर स्तर पर बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे को इस प्रकार सुसज्जित करना होगा कि वे जीवनशैली से जुड़ी इन जटिल बीमारियों का प्रबंधन कर सकें।

5. निष्कर्ष (Conclusion)

NFHS-6 के निष्कर्ष स्पष्ट करते हैं कि भारत को बाल स्वास्थ्य में मिली अपनी जीतों को बरकरार रखते हुए, बिना किसी शिथिलता के सार्वजनिक क्षेत्र में सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को बनाए रखना होगा। इसके साथ ही, नीति निर्माताओं को तुरंत अपना ध्यान संक्रामक रोगों और मातृ स्वास्थ्य से आगे बढ़ाकर गैर-संचारी रोगों और पोषण असंतुलन की ओर स्थानांतरित (Pivot) करना होगा, ताकि भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) एक स्वास्थ्य संकट में न बदल जाए।

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