सार्वजनिक प्रशासन और सुशासन (Good Governance) में जेनेरेटिव एआई (Generative AI) टूल्स—जैसे स्वचालित नीति प्रारूपण (automated policy drafting), जन-शिकायत निवारण (Bhashini-powered chatbots), और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली—का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है। जहाँ यह प्रशासनिक दक्षता को गति देता है, वहीं लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है।
इन चुनौतियों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित कर विश्लेषित किया जा सकता है:
1. नैतिक चुनौतियाँ (Ethical Challenges)
पूर्वाग्रह और भेदभाव (Algorithmic Bias & Discrimination): जेनेरेटिव एआई मॉडल ऐतिहासिक डेटा पर प्रशिक्षित (train) होते हैं। यदि इस डेटा में पहले से ही जाति, लिंग, क्षेत्र या वर्ग को लेकर कोई सामाजिक पूर्वाग्रह है, तो एआई उसे और सुदृढ़ कर देता है। उदाहरण के लिए, कल्याणकारी योजनाओं (welfare schemes) के लाभार्थियों के चयन में एआई अनजाने में हाशिए के समुदायों (marginalised communities) को बाहर कर सकता है।
उत्तरदायित्व का संकट (Accountability Deficit / 'Black Box' Phenomenon): पारंपरिक प्रशासन में किसी गलत निर्णय के लिए लोक सेवक (public servant) को जवाबदेह ठहराया जाता है। परंतु, यदि जेनेरेटिव एआई द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट या निर्णय में कोई गंभीर त्रुटि होती है, तो "जवाबदेही किसकी होगी?"—डेवलपर की, सरकार की, या स्वयं एल्गोरिदम की? इसे एआई का 'ब्लैक बॉक्स' प्रभाव कहते हैं, जहाँ निर्णय के पीछे के तर्क अदृश्य होते हैं।
सहानुभूति और मानवीय विवेक का अभाव (Loss of Human Touch): सुशासन का एक अनिवार्य तत्व 'सहानुभूति' (empathy) है। जेनेरेटिव एआई केवल नियमों और लॉजिक (probabilistic code) पर काम करता है; वह किसी असाधारण मानवीय परिस्थिति (जैसे तकनीकी खराबी के कारण राशन कार्ड लिंक न होने पर भी भूख की स्थिति) को समझने में अक्षम है।
2. गोपनीयता से जुड़ी चुनौतियाँ (Privacy Challenges)
डेटा का अनधिकृत उपयोग (Function Creep): लोक प्रशासन में नागरिकों का अत्यधिक संवेदनशील डेटा (जैसे स्वास्थ्य रिकॉर्ड, वित्तीय स्थिति, बायोमेट्रिक्स) शामिल होता है। जेनेरेटिव एआई टूल्स को फीडबैक या सुधार के लिए जब यह डेटा दिया जाता है, तो इसके वाणिज्यिक या अनधिकृत उद्देश्यों के लिए लीक होने का जोखिम रहता है।
सूचित सहमति का अभाव (Lack of Informed Consent): भारत जैसे देश में, जहाँ डिजिटल साक्षरता (digital literacy) का स्तर अभी भी सीमित है, अधिकांश नागरिकों को यह ज्ञात ही नहीं होता कि उनके डेटा का उपयोग एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया जा रहा है। यह निजता के अधिकार (Right to Privacy) का उल्लंघन है।
गहन निगरानी राज्य (Surveillance State): फेशियल रिकग्निशन (Facial Recognition) और जेनेरेटिव एआई के संयोजन से वास्तविक समय (real-time) में नागरिकों की प्रोफाइलिंग और निगरानी की जा सकती है, जिससे नागरिकों की नागरिक स्वतंत्रता और असहमति व्यक्त करने के अधिकार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
3. आर्थिक चुनौतियाँ (Economic Challenges)
श्रम विस्थापन और बेरोजगारी (Labour Displacement): प्रशासनिक मशीनरी में डेटा एंट्री, दस्तावेज़ों के सारांश (summarisation), और प्रारंभिक स्तर के लिपिकीय (clerical) कार्यों के लिए जेनेरेटिव एआई का उपयोग मानव श्रम की आवश्यकता को कम कर रहा है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अनुमानों के अनुसार, एआई-संचालित स्वचालन (automation) भारत के सेवा और प्रशासनिक क्षेत्रों में रोज़गार संरचना को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
डिजिटल विभाजन का गहरा होना (Exacerbating Digital Divide): जिन क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी बुनियादी ढांचा कमजोर है (विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्र), वहाँ एआई-आधारित सुशासन सेवाएँ पहुँच से बाहर हो जाएँगी। इससे समाज में 'डिजिटल रूप से संपन्न' (Digital Haves) और 'डिजिटल रूप से वंचित' (Digital Have-Nots) के बीच की खाई और चौड़ी होगी।
तकनीकी संप्रभुता और वित्तीय लागत (Strategic Autonomy & Costs): वर्तमान में अधिकांश उन्नत जेनेरेटिव एआई मॉडल और उनके लिए आवश्यक हार्डवेयर (जैसे एडवांस्ड GPUs) विदेशी और निजी टेक कंपनियों के नियंत्रण में हैं। इन पर अत्यधिक निर्भरता से "डिजिटल उपनिवेशवाद" (Digital Colonization) का खतरा बढ़ता है और सरकारी खजाने पर भारी लाइसेंसिंग शुल्क का वित्तीय बोझ पड़ता है।
आगे की राह (Way Forward) — भारत का दृष्टिकोण
इन चुनौतियों से निपटने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी 'इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइंस' (India AI Governance Guidelines) के तहत निम्नलिखित सात सूत्रों (Sutras) को व्यावहारिक रूप से लागू करना आवश्यक है:
┌────────────────────────────────────────────────────────┐
│ सुशासन में उत्तरदायी AI (Responsible AI) │
└───────────────────────────┬────────────────────────────┘
│
┌──────────────────────┼──────────────────────┐
▼ ▼ ▼
┌─────────────────┐ ┌──────────────────┐ ┌─────────────────┐
│ पीपुल फर्स्ट │ │ बाय-डिजाइन │ │ मानव निरीक्षण │
│ (People First) │ │ (Privacy-by-Design)││(Human-in-the-loop)│
├─────────────────┤ ├──────────────────┤ ├─────────────────┤
│नीति निर्माण का │ │डेटा न्यूनीकरण और │ │अंतिम निर्णय │
│उद्देश्य समावेशी │ │सख्त सुरक्षा │ │हमेशा मानव │
│विकास होना चाहिए। │ │मानक लागू करना। │ │अधिकारी का होगा। │
└─────────────────┘ └──────────────────┘ └─────────────────┘
व्याख्यात्मक एआई (Explainable AI - XAI): एआई टूल्स ऐसे होने चाहिए जिनके निर्णयों को ऑडिट और री-चेक (audit and trace) किया जा सके, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
सॉवरेन एआई बुनियादी ढांचा (Sovereign AI Infrastructure): भारत के 'इंडिया एआई मिशन' के तहत स्वदेशी डेटासेट और स्थानीय भाषाओं (जैसे 'भाषिणी') पर आधारित मॉडल्स का विकास किया जाना चाहिए ताकि विदेशी निर्भरता कम हो।
नियामक ढांचा (Regulatory Safeguards): एआई के अनुप्रयोगों को भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम के सिद्धांतों (जैसे उद्देश्य सीमा और डेटा न्यूनीकरण) के साथ कड़ाई से संरेखित किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष (Mains Takeaway): सार्वजनिक प्रशासन में जेनेरेटिव एआई का उपयोग "साध्य नहीं बल्कि साधन" (means, not an end) होना चाहिए। सुशासन की सफलता इस बात में नहीं है कि तकनीक कितनी उन्नत है, बल्कि इस बात में है कि वह संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों की कितनी रक्षा करती है।
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