Monday, June 8, 2026

प्रश्न: "अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े वित्तीय प्रतिबंध और हालिया भू-राजनीतिक रुख भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) और उसकी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाओं के लिए एक गंभीर परीक्षण है।" वर्तमान पश्चिम एशिया संकट और चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

 प्रश्न: "अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े वित्तीय प्रतिबंध और हालिया भू-राजनीतिक रुख भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) और उसकी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाओं के लिए एक गंभीर परीक्षण है।" वर्तमान पश्चिम एशिया संकट और चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

1. भूमिका (Introduction) — लगभग 40 शब्द

  • विषय की शुरुआत: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान कि ईरान पर से प्रतिबंध तब तक नहीं हटाए जाएंगे जब तक कि एक अंतिम 'शांति समझौता' (Peace Deal) नहीं हो जाता, अमेरिका की "लेन-देन कूटनीति" (Transactional Diplomacy) को दर्शाता है।

  • तात्कालिक संदर्भ: यह रुख ऐसे समय में आया है जब 26 अप्रैल 2026 को चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए भारत को मिली अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट (Sanctions Waiver) समाप्त हो चुकी है, जिससे भारत के लिए एक बड़ा राजनयिक संकट खड़ा हो गया है।

2. मुख्य भाग (Body Paragraph I): भारत के हितों पर पड़ने वाला प्रभाव — लगभग 90 शब्द

इस प्रतिबंधात्मक नीति के कारण भारत के आर्थिक और रणनीतिक मोर्चों पर निम्नलिखित चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं:

  • चाबहार परियोजना पर संकट (Connectivity Infrastructure): भारत ने वर्ष 2024 में ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल' को संचालित करने के लिए 10 साल का ऐतिहासिक समझौता किया था। अमेरिकी छूट समाप्त होने के बाद, भारत की यह 23 साल पुरानी महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटक गई है। भारत के पास अब या तो इस परियोजना से बाहर निकलने या अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने का कठिन विकल्प है।

  • यूरेशियाई कनेक्टिविटी बाधित होना: चाबहार बंदरगाह भारत के लिए पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान, मध्य एशिया और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के माध्यम से रूस और यूरोप तक पहुँचने का एकमात्र मुख्य मार्ग था। इस पर रोक लगने से भारत की यूरेशियाई देशों तक भू-राजनीतिक पहुंच कमजोर होगी।

  • ऊर्जा बाजार में विकृति (Imported Inflation): ईरान पर पूर्ण आर्थिक नाकेबंदी के कारण भारतीय रिफाइनरियों को वैकल्पिक सुरक्षित मार्गों से तेल मंगाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। यही कारण है कि भारत को अप्रैल 2026 में रूसी कच्चे तेल के लिए $77.8 प्रति टन का भारी प्रीमियम चुकाना पड़ा, जो देश के राजकोषीय घाटे को बढ़ा रहा है।

3. मुख्य भाग (Body Paragraph II): भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया और विकल्प — लगभग 70 शब्द

┌────────────────────────────────────────┐
│ प्रतिबंधों के बीच भारत के कूटनीतिक विकल्प │
└───────────────────┬────────────────────┘
┌──────────────────────────────────┴──────────────────────────────────┐
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【सामरिक पुनर्गठन (Tactical Shift)】 【सुरक्षित निवेश मॉडल】
• चाबहार के 'शाहिद बेहेश्ती' टर्मिनल की हिस्सेदारी को • जब तक प्रतिबंध नहीं हटते, तब तक भारत
अस्थायी रूप से स्थानीय ईरानी कंपनी को ट्रांसफर करना। 'सागरमाला डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन' जैसे अपने
• भविष्य में स्थिति सुधरने पर पुनः नियंत्रण लेना। वैश्विक एसेट्स को प्रतिबंधों से बचाएगा।
  • हिस्सेदारी का अस्थायी हस्तांतरण (Stake Transfer): अमेरिकी प्रतिबंधों के सीधे प्रभाव से भारतीय सरकारी उपक्रमों (जैसे India Ports Global Limited) को बचाने के लिए भारत वर्तमान में चाबहार फ्री ज़ोन इकाई की हिस्सेदारी को अस्थायी रूप से एक स्थानीय ईरानी कंपनी को स्थानांतरित करने पर विचार कर रहा है, ताकि प्रतिबंध हटने पर इसे वापस लिया जा सके।

  • पश्चिम एशिया में संतुलन (De-coupling Strategy): ट्रंप द्वारा लेबनान (हिज्बुल्लाह) और ईरान के मुद्दों को अलग करने (De-coupling) की रणनीति का लाभ उठाते हुए, भारत ईरान के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह तोड़े बिना, अमेरिका और इजरायल के साथ अपनी तकनीकी और रक्षा साझेदारी को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है।

4. राह (Way Forward) — लगभग 30 शब्द

  • राजनयिक बातचीत: भारत को वाशिंगटन के साथ उच्च स्तरीय बातचीत जारी रखनी चाहिए ताकि चाबहार को "मानवीय सहायता और क्षेत्रीय स्थिरता" के आधार पर प्रतिबंधों से बाहर रखने के लिए राजी किया जा सके।

  • वैकल्पिक गलियारों का विकास: वैश्विक प्रतिबंधों की अनिश्चितता को देखते हुए भारत को भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) और म्यांमार के सित्तवे बंदरगाह (Sittwe Port) जैसे अन्य समुद्री व व्यापारिक मार्गों पर अपनी प्रगति को तेज करना होगा।

5. निष्कर्ष (Conclusion) — लगभग 20 शब्द

  • मूल सारांश: किसी भी संवैधानिक और आर्थिक महाशक्ति के लिए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करना सर्वोपरि है। भारत को वैश्विक महाशक्तियों के आपसी टकराव के बीच एक ऐसी लचीली विदेश नीति अपनानी होगी, जहाँ हमारे राष्ट्रीय विकास के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) किसी बाहरी देश के घरेलू कानूनों के बंधक न बनें।

उत्तर लेखन के लिए महत्वपूर्ण टिप्स:

  • प्रमुख शब्दावली का प्रयोग: उत्तर में Strategic Autonomy, Transactional Diplomacy, Equality of Arms, INSTC और Shahid Beheshti Terminal जैसे शब्दों को रेखांकित (Underline) करें।

  • भू-राजनीतिक समझ: यह स्पष्ट करें कि चाबहार केवल एक व्यापारिक बंदरगाह नहीं है, बल्कि यह चीन के पाकिस्तान में स्थित ग्वादर बंदरगाह (Gwadar Port) के खिलाफ भारत का एक रणनीतिक प्रतिसंतुलन (Counter-balance) है।

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