जापान ने शाही उत्तराधिकार (Royal Succession) के नियमों में ढील दी - लेकिन महिला सम्राटों पर प्रतिबंध बरकरार
एक ऐतिहासिक फैसले में, जापान की संसद ने 1947 के इंपीरियल हाउस लॉ (Imperial House Law) में एक बड़ा संशोधन पारित किया है। इस बदलाव का उद्देश्य देश के शाही परिवार में घटते सदस्यों की संख्या और भविष्य के उत्तराधिकार संकट (Succession Crisis) को टालना है।
हालांकि, नियमों को आधुनिक बनाने के लिए जनता के भारी समर्थन के बावजूद, इस नए कानून में क्रिसैंथिमम थ्रोन (Chrysanthemum Throne - जापान का शाही सिंहासन) पर महिलाओं के बैठने पर प्रतिबंध को बरकरार रखा गया है।
वास्तव में क्या बदलाव आया है?
नए नियम शाही परिवार की परंपरा को बदले बिना केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि शाही परिवार के सदस्यों की संख्या इतनी बनी रहे कि वे अपने आधिकारिक कर्तव्यों को निभा सकें।
राजकुमारियों का शाही दर्जा रहेगा बरकरार: अब महिला शाही सदस्यों (Princesses) को आम नागरिकों (Commoners) से शादी करने के बाद भी अपना शाही दर्जा बनाए रखने की अनुमति दी गई है। इससे पहले, 1947 के कानून के तहत, एक राजकुमारी शादी करते ही आम नागरिक बन जाती थी, जिससे काम करने वाले शाही परिवार का आकार बहुत छोटा हो गया था। (हालांकि, उनके पति और बच्चे आम नागरिक ही रहेंगे और उन्हें उत्तराधिकार की कतार में शामिल नहीं किया जाएगा)।
दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेने की अनुमति: यह कानून अब शाही परिवार को उन 11 पूर्व शाखा परिवारों के अविवाहित पुरुष वंशजों को गोद लेने की अनुमति देता है, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपना शाही दर्जा खो दिया था। हालांकि गोद लिए गए पुरुष स्वयं सिंहासन के हकदार नहीं होंगे, लेकिन भविष्य में उनके होने वाले पुरुष बच्चे उत्तराधिकार के पात्र होंगे।
महिला-विरोधी नियम पर विवाद क्यों?
सिंहासन से महिलाओं को बाहर रखने का यह फैसला जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची (Sanae Takaichi) के कार्यकाल में आया है, जो एक कट्टर रूढ़िवादी हैं और उन्होंने पारंपरिक रूप से चले आ रहे पुरुष रक्त कतार (Paternal Bloodline) का कड़ा बचाव किया है।
इस सख्त रुख ने भारी जन आक्रोश और आलोचना को जन्म दिया है, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
लोकप्रिय राजकुमारी पर प्रतिबंध: सम्राट नारुहितो की इकलौती संतान, राजकुमारी ऐको (24), जापानी जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। मतदान से पहले हुए राष्ट्रीय सर्वेक्षणों (Polls) से पता चला था कि 72% जनता महिला सम्राट के पक्ष में थी। लेकिन इस नए फैसले के तहत, ऐको को हमेशा के लिए सिंहासन से दूर कर दिया गया है।
एक अकेले किशोर पर भारी दबाव: दुनिया के सबसे पुराने वंशानुगत राजशाही (Monarchy) का अस्तित्व अब पूरी तरह से केवल एक व्यक्ति पर निर्भर करता है: राजकुमार हिसाहितो (19), जो सम्राट के भतीजे हैं। परिवार में बचे एकमात्र युवा पुरुष उत्तराधिकारी होने के कारण, पूरे राजवंश का भविष्य अब इस बात पर टिका है कि वे शादी करके एक बेटे को जन्म दें।
| वर्तमान उत्तराधिकार की कतार (Top Line of Succession) |
| 1. क्राउन प्रिंस अकिशिनो (60) – सम्राट के छोटे भाई |
| 2. प्रिंस हिसाहितो (19) – सम्राट के भतीजे (एकमात्र युवा उत्तराधिकारी) |
| 3. प्रिंस हिताची (90) – सम्राट के बुजुर्ग चाचा |
हालांकि इस सुधार ने राजकुमारियों को परिवार में रोककर शाही कामकाज को तुरंत ठप होने से बचा लिया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि सरकार ने संकट का कोई आधुनिक समाधान खोजने के बजाय, इसे केवल कुछ समय के लिए आगे टाल दिया है।
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