प्रेस नोट 3 का पुनर्मूल्यांकन: राष्ट्रीय सुरक्षा, FDI प्रवाह और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संतुलन
UPSC GS-III: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं निवेश मॉडल; GS-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं द्विपक्षीय भू-राजनीति
पाठ्यक्रम एवं मुख्य विषय (Syllabus & Core Themes)
GS Paper-III: अर्थव्यवस्था पर उदारीकरण के प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव; निवेश मॉडल (FDI बनाम FPI); विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी/विनिर्माण (इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, PLI योजना का एकीकरण)।
GS Paper-II: भारत एवं इसके पड़ोसी-संबंध; भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा समझौते।
संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा प्रेस नोट 3 (2020) के नियमों को युक्तिसंगत बनाते हुए भारत के साथ थल सीमा साझा करने वाले देशों से 10% से कम गैर-नियंत्रक लाभकारी स्वामित्व (Beneficial Ownership) वाले विदेशी निवेश को स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के तहत अनुमति दी गई है, जिससे सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना पूंजी प्रवाह को गति मिल सके।
प्रेस नोट 3 का विकास: पूर्ण प्रतिबंध से नपे-तुले प्रवेश तक
अप्रैल 2020: प्रेस नोट 3 (DPIIT)
└─ भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले किसी भी देश (चीन, पाक, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान) से
आने वाले या लाभार्थी स्वामित्व वाले प्रत्येक निवेश के लिए 'सरकारी मार्ग' (Government Approval) अनिवार्य किया गया।
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▼ (मुख्य उद्देश्य: कोविड-19 के दौरान संकटग्रस्त भारतीय कंपनियों के प्रतिकूल/शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण को रोकना)
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2020–2025: व्यावहारिक अड़चनें
└─ वैश्विक फंड जिनमें बहुत कम/निष्क्रिय चीनी सीमित भागीदार (LPs) थे, वे 6 से 18 महीने की लंबी अनुमोदन प्रक्रियाओं में फंस गए;
जिससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कलपुर्जा निर्माण के संयुक्त उद्यम प्रभावित हुए।
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मार्च 2026: नपा-तुला उदारीकरण (FEMA NDI संशोधन)
├─ स्वचालित मार्ग: 10% से कम गैर-नियंत्रक लाभकारी स्वामित्व (Beneficial Ownership) के लिए खोला गया।
├─ फास्ट-ट्रैक विंडो: रणनीतिक विनिर्माण (इलेक्ट्रॉनिक्स, पूंजीगत सामान) के लिए 60 दिनों के भीतर अनुमोदन।
└─ PMLA के साथ एकरूपता: धन शोधन निवारण नियमों के तहत 'लाभकारी स्वामित्व' की मानक परिभाषा लागू की गई।
मुख्य बदलाव: 2020 का ढांचा बनाम 2026 का पुनर्मूल्यांकन
| मापदंड | प्रेस नोट 3 (2020) | संशोधित नीति ढांचा (2026) |
| अनुमोदन मार्ग (Approval Route) | भूमि सीमा साझा करने वाले देशों (LBC) के किसी भी निवेश के लिए अनिवार्य सरकारी मार्ग (शून्य प्रतिशत छूट सीमा)। | यदि सीमावर्ती देश का लाभकारी स्वामित्व 10% से कम और पूरी तरह गैर-नियंत्रक है, तो स्वचालित मार्ग की अनुमति। |
| लाभकारी स्वामित्व मानक | अस्पष्ट मानक; जिससे वैश्विक उद्यम पूंजी (VC) और निजी इक्विटी (PE) फंडों के लिए कानूनी अनिश्चितता बनी रहती थी। | धन शोधन निवारण (PML) नियम, 2005 के मानकों के साथ मानकीकृत और संरेखित। |
| रणनीतिक क्षेत्रों के लिए फास्ट-ट्रैक | कोई निश्चित समय-सीमा नहीं; व्यवहार में स्वीकृतियों में 6 से 18 महीने तक का समय लगता था। | प्राथमिकता वाले विनिर्माण (इलेक्ट्रॉनिक्स घटक, पूंजीगत वस्तुएं, सौर वेफर आदि) के लिए 60 दिनों की समयबद्ध स्वीकृति विंडो। |
| बहुपक्षीय संस्थान (Multilateral Bodies) | ऐसे बहुपक्षीय फंडों को लेकर असमंजस था जिनमें सीमावर्ती देशों का योगदान था। | स्पष्ट किया गया कि वे बहुपक्षीय संस्थाएं जिनमें भारत स्वयं एक सदस्य है, इस प्रतिबंधात्मक जांच से मुक्त रहेंगी। |
रणनीतिक तर्क: भारत ने नीति को क्यों सुगम बनाया?
"पूंजी बनाम माल" की विषमता को दूर करना: भारत चीन से प्रतिवर्ष $100 बिलियन से अधिक मूल्य का माल आयात कर रहा था, जबकि निवेश पर कड़ा प्रतिबंध था। गैर-नियंत्रक संयुक्त उपक्रमों को अनुमति देने से तैयार माल के आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू मूल्य संवर्धन (Domestic Value Addition) को बढ़ावा मिलेगा।
"चीन+1" (China+1) आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनना: वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियां (जैसे Apple, Samsung, EV निर्माता) व्यापक कलपुर्जा पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करती हैं, जहां टियर-2 और टियर-3 आपूर्तिकर्ताओं में अक्सर आंशिक चीनी हिस्सेदारी होती है। पूर्ण प्रतिबंध से उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की गति धीमी होने का खतरा था।
वैश्विक निजी इक्विटी प्रवाह को सुगम बनाना: अमेरिकी या सिंगापुर स्थित वैश्विक संस्थागत फंड, जिनमें सूक्ष्म स्तर पर चीनी पूंजी थी, उन्हें भी सीमावर्ती इकाई मान लिया जाता था। इस ढील से भारतीय स्टार्टअप्स के लिए विदेशी पूंजी का मार्ग प्रशस्त हुआ।
'स्वरूप से अधिक सार' (Substance over Form) का संरक्षण: नियंत्रण की कड़ी जांच जारी रहेगी—यदि किसी विदेशी इकाई के पास विशेष वीटो अधिकार, विशेष मतदान अधिकार या बोर्ड में प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व है, तो उसे अनिवार्य सुरक्षा जांच से गुजरना ही होगा।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति और विनियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियमों के तहत, स्वचालित मार्ग से आने वाले विदेशी निवेश के लिए भारतीय रिजर्व बैंक या संबंधित मंत्रालय से पूर्व अनुमोदन लेना अनिवार्य होता है।
अद्यतन प्रेस नोट ढांचे के अनुसार, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से 10% से कम गैर-नियंत्रक लाभकारी स्वामित्व वाले निवेश स्वचालित मार्ग से आ सकते हैं।
पड़ोसी देशों से सीमा-पार निवेश के संदर्भ में 'लाभकारी स्वामित्व' (Beneficial Ownership) की परिभाषा को धन शोधन निवारण (PML) नियमों के अनुरूप परिभाषित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के तहत किसी पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है (केवल निवेश के बाद निर्धारित समय में सूचना देनी होती है; पूर्व अनुमोदन केवल सरकारी मार्ग में आवश्यक है)। कथन 2 और 3 सही हैं।
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