Thursday, August 27, 2026

कैलोरी-केंद्रित आत्मनिर्भरता से जलवायु-लचीली एवं पोषणयुक्त खाद्य प्रणाली की ओर संक्रमण

  कैलोरी-केंद्रित आत्मनिर्भरता से जलवायु-लचीली एवं पोषणयुक्त खाद्य प्रणाली की ओर संक्रमण

पाठ्यक्रम मैपिंग (Syllabus Mapping):

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III: देश के विभिन्न भागों में मुख्य फसलें और फसल पैटर्न; प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कृषि सब्सिडी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से संबंधित मुद्दे; सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)—उद्देश्य, कार्यप्रणाली, सीमाएं, पुनरुद्धार; बफर स्टॉक और खाद्य सुरक्षा से संबंधित मुद्दे; कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव।

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I / III: जल संसाधन, भूजल क्षरण और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन।

1. मुख्य वैचारिक बदलाव: खाद्य सुरक्षा से "सतत एवं पोषण सुरक्षा"

1960–2010 का दशक: कैलोरी-केंद्रित दृष्टिकोण 2020 का दशक और आगे: जलवायु-लचीला दृष्टिकोण
┌────────────────────────────────────────┐ ┌────────────────────────────────────────┐
│ • हरित क्रांति का दौर │ │ • बहु-फसली डीकार्बोनाइज्ड कृषि │
│ • धान-गेहूं की मोनोकल्चर (एकल फसल) │ संक्रमण │ • पोषक-अनाज (श्री अन्न/कदन्न), दालें │
│ • भूजल-गहन क्षेत्रों पर निर्भरता │ ────────────► │ • भौगोलिक रूप से विकेंद्रीकृत PDS │
│ • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 │ │ • "जलवायु बफर" एवं मौसम पूर्वानुमान │
│ • खाद्यान्न उपलब्धता/मूल्य सीमा │ │ • पोषण सुरक्षा + नेट-जीरो लक्ष्य │
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  • "खाद्य सुरक्षा" से "पोषण एवं सतत सुरक्षा": भारत का खाद्यान्न उत्पादन 350 मिलियन टन (2024-25) के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है, किंतु गेहूं में दानों के भराव के समय लू (हीटवेव), अनिश्चित मानसून और उत्तर-पश्चिमी भारत में गंभीर भूजल संकट जैसी प्रणालीगत कमजोरियां समग्र सुधार की मांग करती हैं।

  • मूल्य-शृंखला आधारित जलवायु जोखिम: जलवायु जोखिम केवल खेत तक सीमित नहीं हैं; खुले में अनाज भंडारण (CAP स्टोरेज), कटाई उपरांत लॉजिस्टिक्स और परिवहन अवसंरचना भी इसके दायरे में आते हैं।

2. जलवायु-लचीले खाद्य ढांचे के 5 प्रमुख रणनीतिक स्तंभ

"जलवायु बफर" (Climate Buffer) के 5 आधार स्तंभ
┌────────────────┬───────────────┼───────────────┬────────────────┐
▼ ▼ ▼ ▼ ▼
विकेंद्रीकृत MSP व खरीद विविधीकृत PDS IMD मौसम लचीली आपूर्ति हरित वित्त एवं
खाद्य टोकरी पूर्वानुमान शृंखला कार्बन ऑफसेट
• उत्तर-पश्चिम भारत से • पोषण हेतु • खरीद व बफर • तापमान-नियंत्रित • ग्रीन बॉन्ड
आगे विस्तार मोटा अनाज स्टॉक का डायनामिक साइलो व कोल्ड व अनुकूलन वित्त
• कम जल-खपत फसलों (मिलेट्स) व प्रबंधन चेन नेटवर्क
को प्रोत्साहन दालें शामिल
  • खरीद में भौगोलिक एवं फसल विविधीकरण:

    • भारतीय खाद्य निगम (FCI) की खरीद को मध्य, पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में स्थानीय रूप से अनुकूलित, सूखा-रोधी मोटे अनाजों (श्री अन्न), दालों और तिलहनों की ओर विस्तारित करना।

  • PDS/NFSA का पोषण संवर्धन:

    • वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) और डिजिटल राशन दुकानों के माध्यम से क्षेत्रीय खान-पान के अनुसार पोषण-समृद्ध खाद्य टोकरी उपलब्ध कराना।

  • संस्थागत "जलवायु बफर" (Climate Buffer):

    • पारंपरिक खाद्यान्न बफर स्टॉक को मौसम-आधारित बीमा, सूक्ष्म सिंचाई अवसंरचना और आपातकालीन भंडार के साथ जोड़कर एक समग्र सुरक्षा घेरा तैयार करना।

  • भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों के साथ समन्वय:

    • धान के खेतों से मीथेन उत्सर्जन कम करने के लिए प्रत्यक्ष बीज बुवाई (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखापन (AWD) जैसी तकनीकों को बढ़ावा देना तथा कृषि को कार्बन जब्ती (Carbon Sequestration) से जोड़ना।

3. तुलनात्मक विश्लेषण: पारंपरिक बनाम जलवायु-लचीली खाद्य प्रणाली

रणनीतिक आयामपारंपरिक धान-गेहूं मॉडल (1965–2020)जलवायु-लचीला खाद्य ढांचा (2026+)
प्राथमिक नीतिगत उद्देश्यकैलोरी की पर्याप्तता और भुखमरी उन्मूलन।पोषण सुरक्षा, पारिस्थितिक संतुलन और जलवायु अनुकूलन।
खरीद का भौगोलिक दायरापंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अत्यधिक संकेंद्रित।कृषि-जलवायु क्षेत्रों (मध्य, पूर्वी और प्रायद्वीपीय भारत) में विकेंद्रीकृत।
फसल विविधताMSP और भंडारण में धान और गेहूं का पूर्ण वर्चस्व।बाजरा, ज्वार, रागी (मोटे अनाज), दालें और तिलहन का संतुलित समावेश।
पारिस्थितिक प्रभावगंभीर भूजल दोहन और उर्वरक/बिजली सब्सिडी पर उच्च निर्भरता।जल-तटस्थ (Water-neutral) फसलें, न्यूनतम रासायनिक बहाव और मृदा स्वास्थ्य संवर्धन।
भंडारण एवं लॉजिस्टिक्सपारंपरिक गोदाम और खुले चबूतरे (CAP स्टोरेज)।तापमान-नियंत्रित हर्मेटिक साइलो और जलवायु-रोधी कोल्ड-चेन नेटवर्क।

4. प्रासंगिक संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार): सर्वोच्च न्यायालय ने PUCL बनाम भारत संघ (2001) मामले में स्पष्ट किया कि जीवन के अधिकार में गरिमा और पोषण के साथ भोजन का अधिकार अंतर्निहित है।

  • अनुच्छेद 47 (राज्य के नीति निदेशक तत्व): नागरिकों के पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा उठाना तथा लोक स्वास्थ्य में सुधार करना राज्य का प्राथमिक कर्तव्य है।

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013: 75% ग्रामीण और 50% शहरी आबादी (लगभग 80 करोड़ लोग) को प्राथमिकता परिवारों (PHH) और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत रियायती खाद्यान्न की कानूनी गारंटी प्रदान करता है।

5. विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs)

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)

प्र.1. (CSE Prelims 2021)

भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से वितरित खाद्यान्न का एक बड़ा हिस्सा निजी कंपनियों द्वारा खुले बाजार से खरीदा जाता है।

  2. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 कानूनी रूप से 75% ग्रामीण और 50% शहरी आबादी को रियायती खाद्यान्न प्राप्त करने का अधिकार देता है।

  3. NFSA के तहत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के छह महीने बाद तक प्रतिदिन 600 कैलोरी का टेक-होम राशन प्राप्त करने का अधिकार है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3

(व्याख्या: खरीद मुख्य रूप से भारतीय खाद्य निगम और राज्य एजेंसियों द्वारा मूल्य-समर्थन संचालन के तहत की जाती है, न कि निजी कंपनियों द्वारा)।

प्र.2. (CSE Prelims 2019)

पिछले पांच वर्षों में भारत में खरीफ फसलों की खेती के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. धान की खेती के अंतर्गत क्षेत्रफल सबसे अधिक है।

  2. ज्वार की खेती के अंतर्गत क्षेत्रफल तिलहन की तुलना में अधिक है।

  3. कपास की खेती का क्षेत्रफल गन्ने से अधिक है।

  4. गन्ने की खेती के अंतर्गत क्षेत्रफल में लगातार कमी आई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 3

(b) केवल 2, 3 और 4

(c) केवल 2 और 4

(d) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (a) केवल 1 और 3

मुख्य परीक्षा (Mains)

  • CSE Mains 2023 (GS Paper III - कृषि):

    "उपभोग आहार में बदलाव और मोटे अनाजों (मिलेट्स) के लिए नीतिगत पहलों के संदर्भ में भारत में फसल पैटर्न में आए बदलावों की व्याख्या कीजिए।" (10 अंक, 150 शब्द)

  • CSE Mains 2021 (GS Paper III - कृषि):

    "राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की मुख्य विशेषताएं क्या हैं? सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) ने भारत में भुखमरी और कुपोषण को दूर करने में किस प्रकार मदद की है?" (15 अंक, 250 शब्द)

  • CSE Mains 2019 (GS Paper III - कृषि):

    "न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था के तहत कुछ फसलों (जैसे चावल और गेहूं) पर दिए गए जोर ने भारत में फसल पैटर्न को किस प्रकार विकृत किया है? कृषि उत्पादन को अधिक विविध और जलवायु-लचीला बनाने के उपाय सुझाइए।" (15 अंक, 250 शब्द)

6. मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: "पारंपरिक खाद्य सुरक्षा प्रतिमान मुख्य रूप से एक केंद्रीकृत धान-गेहूं खरीद प्रणाली के माध्यम से कैलोरी की पर्याप्तता पर केंद्रित था। बढ़ती जलवायु कमजोरियों के आलोक में, मूल्यांकन कीजिए कि भारत पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ते हुए अपनी संपूर्ण कृषि मूल्य शृंखला में एक 'जलवायु बफर' को कैसे संस्थागत रूप दे सकता है। (15 अंक, 250 शब्द)"

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