Thursday, August 27, 2026

शहरी आर्द्रभूमि (Wetlands) का क्षरण: पारिस्थितिक आवश्यकताएं, प्रशासनिक चुनौतियां एवं संरचनात्मक समाधान

 शहरी आर्द्रभूमि (Wetlands) का क्षरण: पारिस्थितिक आवश्यकताएं, प्रशासनिक चुनौतियां एवं संरचनात्मक समाधान

पाठ्यक्रम मैपिंग (Syllabus Mapping):

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I: शहरीकरण, उनकी समस्याएं और उनके समाधान; भौगोलिक विशेषताएं और उनके स्थान—महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-निकायों और हिमावरण सहित) में परिवर्तन।

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन; आपदा और आपदा प्रबंधन (शहरी बाढ़)।

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय (NGT, CPCB); विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप।

1. शहरी आर्द्रभूमियों के मुख्य पारिस्थितिक कार्य एवं आर्थिक मूल्य

आर्द्रभूमि की बहुआयामी सेवाएं
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जलवायु एवं जल विज्ञान जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी सामाजिक-आर्थिक मूल्य
• कार्बन अवशोषण एवं संचयन • सूक्ष्म-आवासों का समर्थन • भूजल पुनर्भरण (Recharge)
• "स्पंज सिटी" बाढ़ नियंत्रक • यूट्रोफिकेशन से बचाव • शहरी तापमान में कमी (Cooling)
• प्राकृतिक जल निकासी • पक्षियों व जलीय जीवों के आवास • पेयजल आपूर्ति का दबाव घटाना
  • उच्च कार्बन संचयन घनत्व: यद्यपि आर्द्रभूमियां पृथ्वी की सतह के लगभग 6% भाग पर ही फैली हैं, फिर भी प्रति इकाई क्षेत्र में उनका कार्बन संचयन स्थलीय वनों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी होता है।

  • शहरी बाढ़ नियंत्रण ("स्पंज अवसंरचना"): झीलें और बाढ़ के मैदान प्राकृतिक जल-धारण बेसिन के रूप में कार्य करते हैं, जो अचानक आने वाले अतिरिक्त पानी को सोखते हैं और शहरी हीट आइलैंड (UHI) प्रभाव को कम करते हैं।

  • भूजल पुनर्भरण: प्राकृतिक जल रिसाव से स्थानीय भूजल स्तर में सुधार होता है, जिससे नगरपालिकाओं की दूरस्थ नदी घाटियों पर निर्भरता कम होती है।

2. शहरी आर्द्रभूमियों के क्षरण के प्रणालीगत कारण

  • रियल एस्टेट का दबाव और उच्च अवसर लागत (Opportunity Cost):

    • टियर-1 और टियर-2 महानगरों में भूमि की कीमतों में भारी उछाल के कारण आर्द्रभूमियों, निचले जल-भराव क्षेत्रों और झीलों के फुल टैंक लेवल (FTL) पर अवैध अतिक्रमण और निर्माण को बढ़ावा मिला है।

  • जल निकासी का विखंडन (Hydrological Disconnection):

    • प्राकृतिक जल वाहिकाओं (राजाकालुवे या फीडर नहरों) के अवरुद्ध होने से जलग्रहण क्षेत्र खंडित हो गए हैं, जिससे वर्षा का जल झीलों तक नहीं पहुंच पाता और सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनती है।

  • प्रदूषण और यूट्रोफिकेशन (Eutrophication):

    • अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस कचरे के सीधे प्रवाह से जल में नाइट्रोजन और फास्फोरस की अत्यधिक वृद्धि होती है, जिससे शैवाल प्रस्फुटन (Algal Blooms) और जलीय जीवन के लिए ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया) हो जाती है।

  • पारिस्थितिक सुधार के स्थान पर केवल 'सौंदर्यीकरण':

    • नगर निकाय अक्सर गाद निकालने, जल शोधन और फीडर चैनलों को बहाल करने के बजाय कंक्रीट के तटबंध, सजावटी लाइटिंग और वॉकवे बनाने जैसे सतही कार्यों को प्राथमिकता देते हैं।

3. विनियामक एवं प्रशासनिक संरचना: तुलनात्मक तालिका

संस्थागत तंत्र / नीतिमुख्य फोकस क्षेत्रसंरचनात्मक सीमाएं एवं क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियां
आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों (SWAs) द्वारा संवेदनशील आर्द्रभूमियों की पहचान और अधिसूचना।नदी के नालों, धान के खेतों और मानव-निर्मित शहरी जल निकायों को बाहर रखा गया; राज्यों द्वारा सीमांकन की गति धीमी।
रामसर अभिसमय (1971)अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों का वैश्विक स्तर पर नामांकन।वैश्विक दर्जा प्राप्त होने मात्र से स्थानीय स्तर पर नगर निगम के प्रदूषण या अवैध निर्माण पर स्वतः रोक नहीं लगती।
मिशन अमृत सरोवर एवं अमृत 2.0 (AMRUT)शहरी जल निकायों का जीर्णोद्धार और स्थानीय वर्षा जल संचयन अवसंरचना का निर्माण।कई बार जल-प्रवाह कनेक्टिविटी और पानी की गुणवत्ता में सुधार किए बिना केवल सिविल निर्माण कार्यों तक सीमित।
लक्षित प्रवर्तन (उदा. HYDRAA मॉडल - तेलंगाना)झील के जल-क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाने हेतु एकीकृत आपदा प्रबंधन और संपत्ति संरक्षण एजेंसी।दीर्घकालिक वैधानिक आधार, अंतर-विभागीय समन्वय और कानूनी स्थगन आदेशों (Stay Orders) से निपटने की आवश्यकता।

4. स्थायी जीर्णोद्धार हेतु संरचनात्मक रूपरेखा

4-स्तंभीय जीर्णोद्धार रूपरेखा
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वैधानिक संरक्षण जल विज्ञान की बहाली एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था
• डिजिटल कैडस्ट्रल मैपिंग • फीडर चैनलों को जोड़ना • एकल उत्तरदायी प्राधिकरण
• FTL/बफर जोन पर शून्य • गाद निकालना व प्राकृतिक • विभागों में बेहतर समन्वय
सहनशीलता (Zero अपवाह की बहाली • स्थानीय नागरिकों/समुदायों
Tolerance) • निर्मित आर्द्रभूमि फिल्टर की संस्थागत भागीदारी
  1. कैडस्ट्रल सीमांकन और जियो-टैगिंग: उपग्रह आधारित सर्वेक्षण के माध्यम से झीलों की सटीक सीमाओं, बफर जोन और अधिकतम जल-प्रसार क्षेत्र को कानूनी रूप से अधिसूचित करना।

  2. एकीकृत शहरी जल निकासी नियोजन: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए जल विज्ञान प्रभाव आकलन (Hydrological Impact Assessment) को अनिवार्य बनाना ताकि प्राकृतिक जलमार्ग बाधित न हों।

  3. पारिस्थितिक इंजीनियरिंग (Eco-Centric Engineering): कंक्रीट निर्माण के स्थान पर निर्मित आर्द्रभूमि (Constructed Wetlands), फ्लोटिंग ट्रीटमेंट वेटलैंड्स (FTWs) और विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) को प्राथमिकता देना।

  4. सामुदायिक सहभागिता: झीलों की निरंतर निगरानी और रखरखाव के लिए स्थानीय नागरिक समूहों ("लेक चैंपियंस" और स्थानीय ट्रस्ट) को नगर निकाय के शासन ढांचे में औपचारिक स्थान देना।

5. विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs)

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)

प्र.1. (CSE Prelims 2022)

यदि किसी विशिष्ट क्षेत्र को 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017' के तहत लाया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(a) राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण जनहित के आधार पर आर्द्रभूमि को गैर-आर्द्रभूमि उपयोग में परिवर्तित करने की अनुमति दे सकता है।

(b) यह गैर-आर्द्रभूमि उपयोगों में रूपांतरण, उद्योगों की स्थापना और ठोस अपशिष्ट डंपिंग को प्रतिबंधित करता है।

(c) यह केंद्र सरकार को राज्य सरकारों से परामर्श किए बिना सीमाओं का निर्धारण करने का अधिकार देता है।

(d) यह मानव निर्मित तालाबों और धान के खेतों सहित सभी आर्द्रभूमियों को अनिवार्य केंद्रीय अधिसूचना के तहत लाता है।

सही उत्तर: (b)

(व्याख्या: 2017 के नियम अधिसूचित आर्द्रभूमि क्षेत्र के भीतर गैर-आर्द्रभूमि उपयोग, औद्योगिक अपशिष्ट प्रवाह, अनुपचारित कचरा डालने और स्थायी निर्माण को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करते हैं)।

प्र.2. (CSE Prelims 2019)

रामसर अभिसमय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. रामसर अभिसमय के तहत भारत सरकार के लिए देश की सभी आर्द्रभूमियों की रक्षा करना अनिवार्य है।

  2. आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2010 रामसर अभिसमय की सिफारिशों के आधार पर बनाए गए थे।

  3. रामसर अभिसमय सचिवालय ग्लैंड, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 3

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3

(व्याख्या: अभिसमय किसी देश की 'सभी' आर्द्रभूमियों की रक्षा को बाध्यकारी नहीं बनाता; यह मुख्य रूप से नामित रामसर स्थलों और सदस्य देशों के विवेकपूर्ण उपयोग के दायित्वों पर लागू होता है)।

मुख्य परीक्षा (Mains)

  • CSE Mains 2020 (GS Paper III - पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन):

    "‘शहरी बाढ़ अब कोई दुर्लभ आपदा नहीं है बल्कि भारतीय महानगरों में एक वार्षिक घटना बन गई है।’ प्राकृतिक जल निकायों और जल निकासी चैनलों के अतिक्रमण के विशेष संदर्भ में शहरी बाढ़ के कारणों की विवेचना कीजिए।" (15 अंक, 250 शब्द)

  • CSE Mains 2018 (GS Paper I - भूगोल):

    "अंतर्देशीय और तटीय आर्द्रभूमियों में 'डेड जोन' के प्रसार और यूट्रोफिकेशन के क्या परिणाम होते हैं? सुधारात्मक पारिस्थितिक उपाय सुझाइए।" (10 अंक, 150 शब्द)

  • CSE Mains 2014 (GS Paper III - पर्यावरण):

    "आर्द्रभूमियां जल चक्र के महत्वपूर्ण घटक और जैव विविधता के प्रमुख केंद्र हैं। भारत में शहरी आर्द्रभूमियों के क्षरण के कारणों पर चर्चा कीजिए और उनके संरक्षण के लिए मौजूद संस्थागत तंत्र का मूल्यांकन कीजिए।" (12.5 अंक, 200 शब्द)

6. मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: "भारत में शहरी आर्द्रभूमियों का क्षरण एक ऐसे विकास मॉडल का परिचायक है जो प्राकृतिक जल निकायों को महत्वपूर्ण पारिस्थितिक अवसंरचना के बजाय केवल रियल एस्टेट संपत्ति के रूप में देखता है। वर्तमान आर्द्रभूमि संरक्षण नियमों की सीमाओं का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए तथा संस्थागत एकीकरण और पारिस्थितिक इंजीनियरिंग को संयोजित करने वाली एक समग्र रणनीति का प्रस्ताव कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)"

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