Wednesday, September 2, 2026

बाबा गुरदित सिंह, कामागाटा मारू प्रकरण

बाबा गुरदित सिंह, कामागाटा मारू प्रकरण

 बाबा गुरदित सिंह, कामागाटा मारू प्रकरण और गदर आंदोलन से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक, खुफिया और अंतरराष्ट्रीय आयामों के गहरे और अनछुए ऐतिहासिक तथ्य:

1. कानूनी दांवपेच और आदेशों की आंतरिक पृष्ठभूमि (Legal Anatomy)

  • ऑर्डर-इन-काउंसिल (Order-in-Council) की भूमिका: कनाडा ने एशियाई प्रवासियों को रोकने के लिए केवल एक नहीं, बल्कि दो विशेष आदेश लागू किए थे:

    1. P.C. 23: जिसने प्रत्येक एशियाई प्रवासी के पास कनाडा में उतरते समय कम से कम $200 (तत्कालीन मुद्रा में एक बड़ी राशि) नकद होना अनिवार्य कर दिया।

    2. P.C. 24 (कंटीन्यूअस जर्नी रेगुलेशन): जिसके तहत उस जहाज से आने पर रोक थी जिसने अपने मूल देश से बिना रुके यात्रा न की हो।

  • मिसाल का आधार (The Legal Precedent): 1913 के अंत में कनाडाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस गॉर्डन हंटर ने 'पनामा मारू' (Panama Maru) नामक जहाज के 35 भारतीय यात्रियों को एक कानूनी खामी के आधार पर प्रवेश की अनुमति दे दी थी। इसी फैसले से प्रेरित होकर बाबा गुरदित सिंह को विश्वास हुआ था कि वे अदालत में कनाडाई सरकार के इस नस्लीय कानून को निरस्त करा लेंगे।

  • मुंशी सिंह टेस्ट केस (Munshi Singh v. The King): वैंकूवर पहुंचने पर सभी यात्रियों के प्रवेश का फैसला एक प्रतिनिधि मामले (Test Case) के रूप में एक यात्री मुंशी सिंह की याचिका पर छोड़ा गया। ब्रिटिश कोलंबिया कोर्ट ऑफ अपील के पांचों जजों ने सर्वसम्मति से याचिका खारिज कर दी और सरकार के निष्कासन आदेश (Deportation Order) को वैध ठहराया।

2. वैंकूवर का जमीनी संघर्ष एवं 'सी लॉयन' घटना (The Sea Lion Incident)

  • द सी लॉयन की झड़प (19-20 जुलाई 1914): कनाडाई आव्रजन अधिकारियों और 150 से अधिक पुलिसकर्मियों ने 'सी लॉयन' (Sea Lion) नामक टगबोट पर सवार होकर कामागाटा मारू पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की थी।

  • यात्रियों का प्रतिरोध: निहत्थे यात्रियों ने जहाज पर रखे कोयले के बड़े-बड़े ढेलों, लोहे के कबाड़ और उबलते हुए पानी से पुलिस बल पर हमला कर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इस विफलता के बाद ही कनाडाई सरकार ने दबाव बनाने के लिए युद्धपोत HMCS Rainbow को तलब किया था।

  • एच.एच. स्टीवंस की भूमिका: वैंकूवर के सांसद एच.एच. स्टीवंस (H.H. Stevens) और आव्रजन अधिकारी मैल्कम रीड (Malcolm Reid) इस नस्लभेदी बहिष्कार के मुख्य रणनीतिकार थे। स्टीवंस ने खुले तौर पर "व्हाइट कनाडा" (White Canada) नीति का प्रचार किया था।

3. खुफिया नेटवर्क, हत्याएं और त्रिपक्षीय निगरानी

  • खुफिया अधिकारी विलियम हॉकिंसन का नेटवर्क: हॉकिंसन भारत, ब्रिटिश कोलंबिया और अमेरिका के बीच काम कर रहे ब्रिटिश खुफिया नेटवर्क का मुख्य एजेंट था। उसने वैंकूवर के गुरुद्वारे और शोर कमेटी में अपने दो मुख्य मुखबिर घुसाए थे—बेला सिंह और बाबू राम।

  • गुरुद्वारे में दोहरा हत्याकांड (5 सितंबर 1914): जासूसी का भंडाफोड़ होने के बाद तनाव इतना बढ़ गया कि बेला सिंह ने वैंकूवर के मुख्य गुरुद्वारे में घुसकर शोर कमेटी के प्रमुख सदस्य भाई भाग सिंह और बदन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी।

  • मेवा सिंह की शहादत (11 जनवरी 1915): हॉकिंसन ने अदालत में बेला सिंह को बचाने के लिए झूठी गवाही की योजना बनाई थी। इसी के जवाब में मेवा सिंह ने अदालत की गैलरी में हॉकिंसन को गोलियों से भून दिया। 11 जनवरी 1915 को मेवा सिंह को फांसी दी गई; उनकी फांसी का दिन आज भी कनाडाई सिख समुदाय द्वारा 'शहीदी दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

4. बज बज की आधिकारिक जांच: 'कमेटी ऑफ इंक्वायरी' (Sir William Vincent Committee)

  • विंसेंट कमेटी का गठन: बज बज गोलीकांड के बाद जनदबाव को शांत करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने सर विलियम विंसेंट की अध्यक्षता में एक जांच समिति (Komagata Maru Inquiry Committee) गठित की।

  • दोषारोपण और लीपापोती: समिति ने अपनी रिपोर्ट में गोलीबारी को ब्रिटिश पुलिस व सेना का 'आत्मरक्षात्मक कदम' बताया और पूरा दोष बाबा गुरदित सिंह और यात्रियों पर मढ़ दिया कि उन्होंने अवैध हथियार छिपा रखे थे और पुलिस पर पहले गोली चलाई थी।

5. गदर नेटवर्क का वैश्विक विस्तार एवं दमन

  • तोशामारू कांड (SS Tosa Maru): कामागाटा मारू की घटना के तुरंत बाद सैन फ्रांसिस्को से गदर कार्यकर्ताओं को लेकर 'तोशामारू' जहाज कोलकाता पहुंचा। ब्रिटिश सरकार ने सतर्क होकर इसके उतरते ही सभी प्रमुख नेताओं को बज बज की तर्ज पर जेलों में डाल दिया।

  • सिंगापुर का सैनिक विद्रोह (फरवरी 1915): कामागाटा मारू और गदर के प्रचार का सीधा असर ब्रिटिश भारतीय सेना की 5वीं नेटिव लाइट इन्फैंट्री (5th Native Light Infantry) पर पड़ा, जिसमें मुख्यतः मुस्लिम सैनिक थे। उन्होंने 15 फरवरी 1915 को सिंगापुर में खुली बगावत कर दी और लगभग एक सप्ताह तक शहर पर नियंत्रण रखा। इस विद्रोह को दबाने के बाद 40 से अधिक सैनिकों को सार्वजनिक रूप से तोप/गोलियों के सामने खड़ा कर मार दिया गया।

  • बर्लिन-भारतीय समिति (Berlin-Indian Committee): यूरोप में वीरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय और लाला हरदयाल ने जर्मन विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर भारतीय स्वतंत्रता समिति बनाई, जिसने एनी लार्सन (Annie Larsen) जहाज और मेवरिक (SS Maverick) के जरिए भारत में हथियारों की तस्करी का असफल प्रयास किया।

6. बाबा गुरदित सिंह का भूमिगत दौर और साहित्यिक धरोहर

  • सात वर्षों का भूमिगत संघर्ष: बज बज गोलीकांड के बाद बाबा गुरदित सिंह रातों-रात हुगली नदी पार कर बच निकले। उन्होंने साधु, व्यापारी और किसान के वेश में भारत के विभिन्न राज्यों में 1914 से 1921 तक गुप्त जीवन बिताया।

  • ननकाना साहिब में आत्मसमर्पण: 1921 में ननकाना साहिब नरसंहार के बाद जब अकाली लहर चरम पर थी, तब महात्मा गांधी की सलाह पर वे भारी जनसमूह के बीच प्रकट हुए और सार्वजनिक रूप से गिरफ्तारी दी।

  • ऐतिहासिक आत्मकथा/दस्तावेज: जेल में और रिहाई के बाद उन्होंने दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पुस्तकें लिखीं:

    1. 'ज़ुल्म दे बाण' (Zulm de Baan - पंजाबी में)

    2. 'Voyage of Komagata Maru: Or India's Slavery Abroad' (अंग्रेजी में) इन पुस्तकों में उन्होंने ब्रिटिश, कनाडाई और जापानी सरकारों के बीच हुए गुप्त पत्राचार का खुलासा किया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि हांगकांग से जहाज रवाना होने से पहले ही लंदन और ओटावा (कनाडा) के बीच यात्रियों को रोकने की गुप्त साजिश रच ली गई थी।

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