राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति (National Policy on Biofuels)
भारत की राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) को मूल रूप से वर्ष 2018 में अधिसूचित किया गया था और 2022 में इसमें महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना, विदेशी मुद्रा की बचत करना, किसानों की आय बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) के लक्ष्य
E10 (10% सम्मिश्रण): भारत ने पेट्रोल में 10% एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य नवंबर 2022 की निर्धारित समयसीमा से पहले ही (जून 2022 में) पूरा कर लिया था।
E20 (20% सम्मिश्रण):
2018 की मूल नीति में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य वर्ष 2030 तय किया गया था।
2022 के संशोधन के तहत इस लक्ष्य की समयसीमा को 5 वर्ष पहले खिसकाकर 2025-26 कर दिया गया।
डीजल में बायोडीजल सम्मिश्रण: वर्ष 2030 तक डीजल में 5% बायोडीजल मिलाने का सांकेतिक लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति की मुख्य विशेषताएं
कच्चे माल (Feedstocks) के दायरे का विस्तार: नीति ने एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल गन्ने के शीरे (Molasses) पर निर्भरता खत्म की। अब गन्ने का रस, चुकंदर, मीठा ज्वार, स्टार्च युक्त सामग्री जैसे मक्का, कसावा और एफसीआई (FCI) के पास उपलब्ध अधिशेष व क्षतिग्रस्त खाद्यान्न (टूटा चावल, सड़ा गेहूं) के उपयोग की अनुमति है।
जैव-ईंधनों का स्पष्ट वर्गीकरण:
बेसिक बायोफ्यूल (1G): पहली पीढ़ी के जैव-ईंधन, जो सीधे खाद्य फसलों/शर्करा से बनते हैं (बायो-एथेनॉल और बायोडीजल)।
उन्नत जैव-ईंधन (Advanced Biofuels):
2G (दूसरी पीढ़ी): गैर-खाद्य बायोमास, कृषि अवशेष (पराली, खोई, लकड़ी) और नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (MSW) से बने ईंधन।
3G (तीसरी पीढ़ी): शैवाल (Algae) आधारित जैव-ईंधन।
वित्तीय व बुनियादी ढांचा प्रोत्साहन:
प्रधानमंत्री जी-वन योजना (PM JI-VAN): 2G बायो-एथेनॉल परियोजनाओं और वाणिज्यिक संयंत्रों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता।
डिस्टिलरी स्थापित करने के लिए ब्याज अनुदान (Interest Subvention) और एथेनॉल पर जीएसटी (GST) को 18% से घटाकर 5% किया गया।
नीति के प्रमुख लाभ और आगामी दिशा
| क्षेत्र | हासिल प्रभाव / लक्ष्य |
| विदेशी मुद्रा बचत | कच्चे तेल के आयात बिल में भारी कटौती। |
| किसान समृद्धि | किसानों को फसल अवशेषों और अधिशेष उपज का सुनिश्चित बाजार ("अन्नदाता से ऊर्जादाता")। |
| पर्यावरण | वाहनों से होने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी। |
| अगला कदम | E20 के बाद अब देश में फ्लेक्स-फ्यूल इंजन (Flex-Fuel Vehicles) और उच्च सम्मिश्रण (E85/E100) का आधार तैयार किया जा रहा है। |
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