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Friday, August 1, 2025

प्रश्न: “भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार विवादों का प्रभाव और समाधान खोजिए।”

 

प्रश्न: “भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार विवादों का प्रभाव और समाधान खोजिए।”


परिचय (Introduction):

भारत और अमेरिका के बीच संबंध विविध क्षेत्रों में फैले हुए हैं – रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, टेक्नोलॉजी, और व्यापार। परंतु हाल के वर्षों में व्यापारिक तनावों ने इस बहुआयामी संबंध को प्रभावित किया है। अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ लगाना, भारत का प्रतिकार, और व्यापार समझौतों की विफलता, ऐसे ही विवाद हैं जो द्विपक्षीय रिश्तों को प्रभावित करते हैं।


मुख्य प्रभाव (Impact of Trade Disputes):

1.  आर्थिक साझेदारी पर असर:

  • अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।

  • टैरिफ विवादों से निर्यात में अस्थिरता, MSME सेक्टर पर प्रभाव, और FDI में हिचकिचाहट उत्पन्न होती है।

2.  निर्यात-आधारित क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव:

  • स्टील, एल्युमिनियम, फार्मा, और कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी शुल्कों से प्रतिस्पर्धा घटती है

  • उदाहरण: GSP (Generalized System of Preferences) से भारत को बाहर करने से $5.6 बिलियन के निर्यात प्रभावित हुए।

3.  विश्व व्यापार संगठन (WTO) में विवाद:

  • दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ WTO में याचिकाएं दायर की हैं — इससे वैश्विक मंच पर छवि प्रभावित होती है।

4.  रणनीतिक वार्ता की गति में बाधा:

  • व्यापार विवादों के चलते QUAD, Indo-Pacific रणनीति, और ऊर्जा सहयोग में भी अविश्वास पनपता है

5.  राजनीतिक दबाव और घरेलू नीति का प्रभाव:

  • ट्रंप जैसे नेताओं ने भारत पर चीन जैसी "कर" नीति अपनाने का आरोप लगाया।

  • इससे लोकल पॉलिटिक्स वैश्विक नीति को प्रभावित करती है।


समाधान (Solutions to Resolve Trade Disputes):

1.  द्विपक्षीय संवाद पुनः आरंभ करना:

  • India–U.S. Trade Policy Forum (TPF) को सक्रिय बनाना चाहिए, जो 2017 से निष्क्रिय था।

  • नए मुद्दों जैसे डिजिटल टैक्सेशन, डेटा लोकलाइजेशन पर संवाद आधारित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

2.  व्यवहारिक समझौते की नीति:

  • व्यापार संतुलन बनाने हेतु सेवाओं, शिक्षा, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को भी व्यापार वार्ता में लाया जाए।

  • WTO रूल्स के तहत सहमति आधारित समाधान तलाशें।

3.  समानान्तर व्यापारिक सहयोग:

  • IMEC, QUAD, और I2U2 जैसे मंचों के माध्यम से व्यापार के वैकल्पिक रास्ते तैयार करें, जिससे एक देश पर निर्भरता कम हो

4.  GSP जैसी रियायतों की पुनर्स्थापना के लिए लचीलापन दिखाना:

  • घरेलू हितों की रक्षा करते हुए प्रगतिशील टैरिफ नीतियाँ अपनाना, जिससे दोनो पक्ष संतुष्ट रहें।

5.  निजी क्षेत्र व थिंक टैंकों की भागीदारी:

  • व्यापारिक समस्याओं का समाधान केवल सरकार नहीं, बल्कि उद्योग, अकादमिक जगत और नीति संस्थानों की भागीदारी से संभव है।


निष्कर्ष (Conclusion):

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में असहमति नई बात नहीं है, परंतु रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक विवादों से ऊपर उठाना आवश्यक है।

जब दोनों लोकतंत्र साझा मूल्यों, हितों और चुनौतियों का सामना करते हैं, तब व्यापार संबंधों को संवेदनशीलता और परिपक्वता से संभालना ही दीर्घकालिक साझेदारी की कुंजी होगी।

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