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Tuesday, August 26, 2025

चुनावी सत्यनिष्ठा, चुनाव आयोग की शक्ति और लोकतांत्रिक सुरक्षा उपाय: यूपीएससी के लिए एक गहन विश्लेषण

 चुनावी सत्यनिष्ठा, चुनाव आयोग की शक्ति और लोकतांत्रिक सुरक्षा उपाय: यूपीएससी के लिए एक गहन विश्लेषण

परिचय

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को लेकर recent events ने चुनावी सत्यनिष्ठा, संवैधानिक प्राधिकार की सीमाओं और भारतीय लोकतंत्र के स्वास्थ्य पर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है। एक यूपीएससी अभ्यर्थी के लिए, यह सिर्फ करंट अफेयर्स नहीं है; यह राजव्यवस्था, शासन और नैतिकता के प्रतिच्छेदन का एक live case study है। यह ब्लॉग इस मुद्दे का विश्लेषण करेगा, इसे यूपीएससी पाठ्यक्रम से जोड़ेगा, संबंधित संवैधानिक प्रावधानों की जांच करेगा और महत्वपूर्ण पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) की समीक्षा करेगा।


विवाद का केंद्र: दो प्रेस कॉन्फ्रेंस

यह घटनाक्रम दो pivotal press conferences से शुरू हुआ जिसने एक संवैधानिक और राजनीतिक मुकाबले का मंच तैयार किया।

  1. विपक्ष के नेता (LoP), राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस (7 अगस्त, 2025):

    • आरोप: LoP ने 2024 के आम चुनावों के दौरान बंगलौर central parliamentary constituency के महादेवपुरा विधानसभा segment में मतदाता सूची में alleged mass manipulation के सबूत पेश किए।

    • विशिष्ट आरोप: उनके खुलासे में शामिल थे:

      • एक ही पते पर कई मतदाताओं (कुछ मामलों में 80 तक) का पंजीकरण।

      • पिता का नाम 'xyz' और मकान नंबर '0' दर्ज करके बोगस entries बनाना।

    • महत्व: यदि सत्य हैं, तो ऐसी अनियमितताएं निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों की जड़ पर प्रहार करती हैं, जो universal adult suffrage के सिद्धांत और भारत के लोकतंत्र की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं।

  2. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की प्रेस कॉन्फ्रेंस (17 अगस्त, 2025):

    • जवाब: technical रूप से specific allegations को संबोधित करने के बजाय, ECI ने LoP को एक अल्टीमेटम जारी किया: या तो शपथ पत्र (sworn affidavit) के माध्यम से सबूत प्रदान करें या राष्ट्र से माफी मांगें।

    • जनता की धारणा: इस प्रतिक्रिया को एक तटस्थ संवैधानिक निकाय के लिए adversarial और असामान्य माना गया। इसने ECI की भूमिका पर सवाल खड़े किए: क्या यह एक निष्पक्ष मध्यस्थ है या राजनीतिक हंगामे में एक प्रतिभागी?


यूपीएससी पाठ्यक्रम से कनेक्शन

यह मुद्दा जीएस पेपर II, III और IV में उत्तरों के लिए एक goldmine है।

  • जीएस पेपर II:

    • भारतीय संविधान—ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं: ECI जैसे संवैधानिक निकायों की भूमिका और शक्तियाँ।

    • सांविधिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय: ECI की संरचना, कार्य और स्वतंत्रता।

    • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएं।

    • विभिन्न अंगों के बीच शक्ति पृथक्करण; विवाद निवारण तंत्र।

  • जीएस पेपर II: शासन (Governance)

    • शासन के महत्वपूर्ण पहलू: पारदर्शिता और जवाबदेही।

    • लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका। (ECI को अधिकारियों के एक cadre द्वारा समर्थित किया जाता है)

  • जीएस पेपर IV: नीतिशास्त्र (Ethics)

    • नीतिशास्त्र और मानव इंटरफेस: सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और गैर-पक्षपात।

    • भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ: चुनावी दुर्व्यवहार राजनीतिक भ्रष्टाचार का एक रूप है।

    • शासन में सत्यनिष्ठा (Probity): संवैधानिक प्राधिकारियों की जवाबदेही।


संवैधानिक और कानूनी प्रावधान एक नजर में

  1. अनुच्छेद 324: चुनावों का पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण।

    • ECI को free and fair चुनाव कराने के लिए vast powers प्रदान करता है।

    • सुप्रीम कोर्ट ने इसे "शक्तियों का reservoir" कहा है।

    • चुनौती: ये शक्तियाँ "unfettered" या "arbitrary" नहीं हैं। इन्हें संविधान और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के ढांचे के within ही प्रयोग किया जाना चाहिए।

  2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950:

    • मतदाता सूचियों के preparation और revision से संबंधित है।

    • धारा 14(b): मतदाता पंजीकरण के लिए किसी व्यक्ति की आयु और निवास निर्धारित करने के लिए 1 जनवरी को एकमात्र 'qualifying date' निर्धारित करती है।

    • धारा 21: मतदाता सूचियों के revision का प्रावधान करती है। यह हो सकता है:

      • सारांश revision (Summary Revision): नाम जोड़ने/हटाने की एक routine process।

      • गहन revision (Intensive Revision): इसमें सूची को fresh तैयार करने के लिए house-to-house verification शामिल है।

      • विशेष revision (Special Revision): यह किसी भी समय specific constituencies के लिए किया जा सकता है, लेकिन qualifying date 1 जनवरी ही रहती है।

  3. निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960:

    • नियम 25: गहन revision की प्रक्रिया का विवरण देता है, जिसके लिए registration officers को details verify करने के लिए हर dwelling house का दौरा करना आवश्यक है।


बिहार SIR विवाद: एक तकनीकी misstep?

बिहार में ECI का चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), जहां विधानसभा चुनाव होने हैं, इस कहानी का एक critical हिस्सा है।

  • समस्या: "विशेष गहन पुनरीक्षण" शब्द RPA, 1950 या 1960 के नियमों में नहीं मिलता है।

  • योग्यता तिथि का उल्लंघन: SIR 1 जुलाई को qualifying date के रूप में उपयोग करता है, जो सीधे तौर पर RPA, 1950 की धारा 14(b) का उल्लंघन करता है, जो explicitly 1 जनवरी को qualifying date निर्धारित करती है।

  • अव्यावहारिक timeline: पूरे बिहार जैसे राज्य में house-to-house verification की आवश्यकता वाला "गहन revision" एक महीने के भीतर निष्पक्ष रूप से पूरा करना logistically impossible है। इससे अराजकता फैली है और ~65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे एक राजनीतिक agitation शुरू हो गई है।

  • सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: एक interim order में, SC ने ECI को नाम और deletion के कारण प्रकाशित करने का निर्देश दिया, transparency को बनाए रखा। कोर्ट का यह आदेश ECI की शक्ति के प्रयोग पर एक check था।


पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) पिछले 8 वर्षों में

इस विषय पर लगातार पूछा जाता रहा है। यहां कुछ प्रासंगिक प्रश्न दिए गए हैं:

  1. 2023: "भारत का सुप्रीम कोर्ट संविधान में संशोधन की संसद की मनमानी शक्ति पर अंकुश रखता है।" समालोचनात्मक चर्चा करें। (संवैधानिक निकायों की शक्ति पर checks से संबंधित)

  2. 2022: "राज्यपाल द्वारा विधायी शक्तियों के प्रयोग के लिए आवश्यक शर्तों पर चर्चा करें। विधानमंडल के समक्ष रखे बिना राज्यपाल द्वारा अध्यादेशों को दोबारा लागू करने की वैधता पर चर्चा करें।" (संवैधानिक प्राधिकार की सीमाओं की समझ का परीक्षण)

  3. 2021: "आपके विचार में, संसद किस हद तक भारत में कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने में सक्षम है?" (ECI जैसे institutions की जवाबदेही से संबंधित)

  4. 2020: "न्यायिक विधान (Judicial Legislation) भारतीय संविधान में परिकल्पित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के विपरीत है। इस संदर्भ में कार्यपालिका अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी करने की प्रार्थना करने वाली बड़ी संख्या में जनहित याचिकाओं (PILs) की दाखिल को उचित ठहराएं।" (न्यायपालिका द्वारा कार्यपालिका/संवैधानिक निकायों की जांच पर सीधे)

  5. 2019: "विकास योजना के नव-उदारवादी paradigm के संदर्भ में, बहु-स्तरीय योजना संचालन को लागत प्रभावी बनाने और कई कार्यान्वयन बाधाओं को दूर करने की उम्मीद है।' चर्चा करें।" (अप्रत्यक्ष रूप से शासन और कार्यान्वयन पर)

  6. 2018: "क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला (जुलाई 2018) दिल्ली के उप-राज्यपाल और निर्वाचित सरकार के बीच राजनीतिक खींचतान को सुलझा सकता है?" (राजनीतिक विवादों में संवैधानिक निकायों पर केस स्टडी)

  7. 2017: "राज्यपाल की भूमिका अhung assemblies में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जांच करें।" (तटस्थ संवैधानिक प्राधिकारियों के आचरण से संबंधित)


मुख्य परीक्षा (Mains) उत्तर लेखन के लिए महत्वपूर्ण शब्द और अवधारणाएं

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324

  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951

  • योग्यता तिथि (1 जनवरी)

  • मतदाता सूचियों का सारांश बनाम गहन पुनरीक्षण

  • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव (बुनियादी संरचना सिद्धांत)

  • न्यायिक समीक्षा

  • संवैधानिक नैतिकता बनाम संवैधानिक शिष्टाचार

  • संवैधानिक निकायों की तटस्थता और स्वतंत्रता

  • एस.आर. बोम्मई मामला (न्यायिक समीक्षा पर)

  • ए.सी. जोस बनाम शिवन पिल्लई मामला (1984) - ECI की शक्ति की सीमाओं पर)


आगे का रास्ता और निष्कर्ष

वर्तमान स्थिति भारतीय लोकतंत्र के लिए एक critical juncture प्रस्तुत करती है।

  • ECI का प्राथमिक कर्तव्य: इसका मौलिक संवैधानिक दायित्व मतदाता सूची की सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करना है। जब गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो उनकी पारदर्शी तरीके से जांच करना और systemic faults को ठीक करना इसका duty है, न कि राजनीतिक अल्टीमेटम में engage करना।

  • पारदर्शिता की आवश्यकता: बिहार मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश, जो deletion के नाम और कारणों के प्रकाशन का निर्देश देता है, जवाबदेही के लिए एक healthy precedent स्थापित करता है।

  • शक्ति और जिम्मेदारी का संतुलन: जैसा कि न्यायमूर्ति फजल अली ने ए.सी. जोस मामले (1984) में presciently चेतावनी दी थी, ECI के हाथों में असीमित और मनमानी शक्ति "राजनीतिक havoc" या "संवैधानिक संकट" पैदा कर सकती है। ECI को अनुच्छेद 324 के तहत अपनी vast powers का प्रयोग utmost न्यायिकता और तटस्थता के साथ करना चाहिए।

यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए, यह episode एक stark reminder है कि संविधान के theoretical provisions को वास्तविक दुनिया में constantly tested किया जाता है। शक्ति के नाजुक संतुलन, institutional integrity के महत्व और judicial oversight की भूमिका को समझना न केवल परीक्षा के लिए, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के informed citizens बनने के लिए महत्वपूर्ण है।

सूचित रहें, आगे रहें!

- टीम सूर्यवंशी आईएएस

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