Tuesday, September 9, 2025

बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण में पहचान हेतु आधार: सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

 

बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण में पहचान हेतु आधार: सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

By Suryavanshi IAS


📌 पृष्ठभूमि

  • मामला: सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि बिहार की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान आधार को 12वें “सूचक दस्तावेज़” के रूप में स्वीकार किया जाए।

  • स्पष्टता: आधार केवल पहचान व निवास का प्रमाण होगा, नागरिकता का नहीं

  • समस्या: ज़मीनी स्तर पर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने आधार को अस्वीकार किया, जिससे अदालत की अवमानना के आरोप लगे।


📌 संवैधानिक और विधिक पहलू

  1. अनुच्छेद 324 – चुनाव कराने का अधिकार चुनाव आयोग को।

  2. अनुच्छेद 326 – सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार।

  3. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 – मतदाता सूची का निर्माण व पुनरीक्षण।

  4. आधार अधिनियम, 2016 – आधार केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं।

  5. सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी:

    • आधार राशन कार्ड/पासपोर्ट की तरह पहचान दस्तावेज़ है।

    • RP Act में आधार “निवास प्रमाण” के रूप में पहले से स्वीकार्य है।


📌 प्रशासनिक व नैतिक चुनौतियाँ

  • ECI की चिंता: नकली राशन कार्ड/आधार से पात्रता की जाँच कठिन।

  • ज़मीनी चुनौती: BLOs न्यायालय आदेश मानने पर दंडित किए जा रहे।

  • नैतिक आयाम:

    • समावेशन बनाम शुद्धता: वास्तविक मतदाताओं को शामिल करना बनाम सूची की शुद्धता।

    • प्रशासनिक दुविधा: न्यायालय व आयोग के आदेशों में विरोध।


📌 चुनावी सुधारों के लिए महत्व

  1. हाशिये के मतदाताओं का समावेशन – आधार से पहुँच आसान।

  2. आधार की सीमा – नागरिकता का प्रमाण न होने से दुरुपयोग रोका जा सकता है।

  3. न्यायिक निगरानी – आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित।

  4. लोकतांत्रिक प्रशासन – न्यायपालिका और प्रशासन में संतुलन।


📌 UPSC सिलेबस से संबंध

  • GS-I (भारतीय राजव्यवस्था): चुनाव प्रक्रिया, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार।

  • GS-II (शासन व संविधान):

    • अनुच्छेद 324 की शक्ति।

    • चुनाव सुधार।

    • न्यायिक समीक्षा व प्रशासनिक चुनौतियाँ।

  • GS-III (विज्ञान व तकनीक): आधार व डिजिटल गवर्नेंस।

  • GS-IV (नैतिकता): निष्पक्षता, समावेशन और पारदर्शिता।


📌 पिछले वर्षों के UPSC प्रश्न (8 सालों में)

  • GS-II, 2018: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर हाल के विवादों के प्रकाश में भारत में चुनाव आयोग के सामने चुनावों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में क्या चुनौतियाँ हैं?

  • GS-II, 2021: “न्यायिक विधिनिर्माण शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के प्रतिकूल है।” इस संदर्भ में, कार्यपालिका के लिए दिशा-निर्देश जारी करने हेतु दायर बड़ी संख्या में जनहित याचिकाओं को न्यायोचित ठहराइए। (संबंधित: न्यायपालिका की सक्रियता)।


📌 अभ्यास हेतु संभावित प्रश्न

  1. बिहार की मतदाता सूची पुनरीक्षण में आधार को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  2. चुनावी सुधारों के संदर्भ में आधार की भूमिका व सीमाएँ स्पष्ट कीजिए।

  3. न्यायालय के आदेशों और प्रशासनिक स्तर पर उनके अनुपालन में आने वाली नैतिक चुनौतियों का विवेचन कीजिए।


📌 आगे की राह

  • स्पष्ट दिशा-निर्देश: BLOs को एकरूप आदेश।

  • जन-जागरूकता: नागरिकता व पहचान में अंतर स्पष्ट।

  • पुनरीक्षण व्यवस्था: समय-समय पर ऑडिट।

  • संतुलन: समावेशन (वोटर अधिकार) और शुद्धता (चुनाव की अखंडता) दोनों।


📌 UPSC के लिए निष्कर्ष

यह मामला दर्शाता है:

  • संविधान, कानून, तकनीक और शासन का परस्पर तालमेल।

  • न्यायपालिका की भूमिका: समावेशन व अधिकारों की रक्षा।

  • प्रशासनिक चुनौतियाँ: लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षण।

UPSC में इसे GS-II (चुनाव आयोग/सुधार), GS-III (तकनीक व गवर्नेंस) और GS-IV (नैतिकता व निष्पक्षता) में उद्धृत किया जा सकता है।

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