भारतीय संविधान का अनुच्छेद 85: संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन
अनुच्छेद 85 भारतीय संसद की बैठकों के आयोजन, उनकी कार्यप्रणाली और कार्यपालिका (Executive) व विधायिका (Legislature) के बीच संतुलन का मूल आधार है।
अनुच्छेद 85(1): संसद का सत्र आहूत करना (Summoning)
"राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर, जो वह ठीक समझे, अधिवेशन के लिए आहूत करेगा, किंतु उसके एक सत्र की अंतिम बैठक और आगामी सत्र की पहली बैठक की तारीख के बीच छह मास का अंतर नहीं होगा।"
1. सत्र आहूत करने (बुलाने) की शक्ति
नाममात्र बनाम वास्तविक शक्ति: संसद का सत्र बुलाने की औपचारिक शक्ति राष्ट्रपति के पास है, लेकिन अनुच्छेद 74(1) के तहत राष्ट्रपति यह कार्य प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर ही करते हैं।
समय और स्थान: राष्ट्रपति समय और स्थान तय करते हैं। सामान्यतः यह नई दिल्ली स्थित संसद भवन होता है, लेकिन संविधान किसी अन्य स्थान पर बैठक बुलाने पर रोक नहीं लगाता।
2. 6 महीने का नियम (The 6-Month Rule)
एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच अधिकतम 6 महीने से अधिक का अंतराल नहीं हो सकता।
इसका अर्थ है कि संसद की वर्ष में कम से कम दो बैठकें अवश्य होनी चाहिए।
3. संवैधानिक नियम बनाम संसदीय परंपरा
संविधान में सत्रों की न्यूनतम संख्या या दिनों की संख्या तय नहीं है। परंपरा के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष तीन सत्र होते हैं:
बजट सत्र (Budget Session): सबसे लंबा सत्र (फरवरी से मई)।
मानसून सत्र (Monsoon Session): मध्य-वर्ष का सत्र (जुलाई से अगस्त/सितंबर)।
शीतकालीन सत्र (Winter Session): सबसे छोटा सत्र (नवंबर से दिसंबर)।
अनुच्छेद 85(2): सत्रावसान और विघटन (Prorogation and Dissolution)
"राष्ट्रपति समय-समय पर—
(क) सदनों का या किसी सदन का सत्रावसान कर सकेगा;
(ख) लोक सभा का विघटन कर सकेगा।"
खंड (क): सत्रावसान (Prorogation)
परिभाषा: राष्ट्रपति द्वारा जारी औपचारिक आदेश, जो केवल उस दिन की बैठक को नहीं, बल्कि पूरे सत्र को समाप्त करता है।
प्रक्रिया: पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) द्वारा सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित (Adjournment Sine Die) किए जाने के बाद, कैबिनेट की सिफारिश पर राष्ट्रपति सत्रावसान की अधिसूचना जारी करते हैं।
विधेयकों एवं प्रस्तावों पर प्रभाव:
विधेयक (Bills): सत्रावसान से लंबित विधेयक समाप्त (Lapse) नहीं होते (अनुच्छेद 107(3))।
अन्य सूचनाएं (Notices): संकल्प, प्रस्ताव और प्रश्नों से संबंधित लंबित सूचनाएं समाप्त हो जाती हैं और उन्हें अगले सत्र में पुनः लाना होता है (विधेयक पेश करने की सूचना को छोड़कर)।
खंड (ख): विघटन (Dissolution)
परिभाषा: विघटन से लोक सभा का जीवनकाल समाप्त हो जाता है और नए चुनाव कराने पड़ते हैं।
राज्य सभा का स्थायित्व: राज्य सभा एक स्थायी सदन है और इसका कभी विघटन नहीं हो सकता (अनुच्छेद 83(1)); इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं।
विघटन के प्रकार:
स्वतः विघटन: 5 वर्ष का सामान्य कार्यकाल पूरा होने पर।
कार्यकाल पूर्व विघटन: कैबिनेट की सलाह पर 5 वर्ष पूरे होने से पहले राष्ट्रपति द्वारा।
राष्ट्रपति का स्वविवेक: यदि कोई प्रधानमंत्री सदन में बहुमत खो देता है और विघटन की सिफारिश करता है, तो राष्ट्रपति उस सलाह को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं; वह वैकल्पिक सरकार की संभावना तलाश सकते हैं।
स्थगन, सत्रावसान और विघटन में मुख्य अंतर
| लक्षण | स्थगन / अनिश्चित काल स्थगन (Adjournment) | सत्रावसान (Prorogation - Art. 85(2)(a)) | विघटन (Dissolution - Art. 85(2)(b)) |
| प्राधिकारी | पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष / सभापति) | राष्ट्रपति | राष्ट्रपति |
| क्षेत्र | केवल उस दिन/सप्ताह की बैठक समाप्त होती है | पूरा संसदीय सत्र समाप्त होता है | लोक सभा का संपूर्ण अस्तित्व समाप्त होता है |
| लागू होना | लोक सभा और राज्य सभा दोनों पर | लोक सभा और राज्य सभा दोनों पर | केवल लोक सभा पर |
| विधेयकों पर प्रभाव | कोई प्रभाव नहीं | विधेयक समाप्त (Lapse) नहीं होते | अनुच्छेद 107 के नियमों के अनुसार कई विधेयक समाप्त हो जाते हैं |
UPSC अभ्यास प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा)
प्रश्न: भारतीय संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
संविधान में यह स्पष्ट प्रावधान है कि संसद के वर्ष में कम से कम तीन सत्र आयोजित किए जाने अनिवार्य हैं।
राष्ट्रपति को संसद के किसी भी सदन का सत्रावसान करने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा को भंग (विघटित) किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान केवल यह कहता है कि दो सत्रों के बीच 6 महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए (सत्रों की संख्या तय नहीं है)। कथन 2 सही है (अनुच्छेद 85(2)(क))। कथन 3 गलत है क्योंकि राज्य सभा एक स्थायी सदन है और इसका कभी विघटन नहीं होता (अनुच्छेद 83(1))।
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