प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC) एवं सूक्ष्म सिंचाई
1. विषय का समग्र विश्लेषण (Comprehensive Theoretical & Policy Framework)
सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation) और 'प्रति बूंद अधिक फसल' (PDMC) केवल कृषि प्रौद्योगिकी नहीं, बल्कि भारत की जल-सुरक्षा, खाद्य-सुरक्षा एवं जलवायु-अनुकूलन (Climate Resilience) की त्रिमूर्ति का आधार स्तंभ हैं।
जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency - WUE) का तुलनात्मक विश्लेषण
बाढ़ सिंचाई (Surface/Flood Irrigation): इसकी दक्षता मात्र 30–40% होती है। अधिकांश जल वाष्पीकरण (Evaporation), रिसाव (Seepage) और सतही अपवाह (Runoff) में नष्ट हो जाता है।
स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler Irrigation): इसकी दक्षता 60–70% तक होती है। यह असमान/ढलान वाली भूमि और उथली मृदा के लिए उपयुक्त है।
ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation): इसकी दक्षता 90% से अधिक होती है। जल सीधे पौधों के जड़-क्षेत्र (Root Zone) में बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है, जिससे खरपतवार नियंत्रण और ऊर्जा की भारी बचत होती है।
2. नीतिगत विकास एवं संस्थागत अभिसरण (Institutional & Policy Evolution)
3. तकनीकी एवं वित्तीय मापदंड (Technical & Financial Architecture)
| पैरामीटर / घटक | प्रावधान / मानक विवरण | विश्लेषणात्मक महत्व (Exam Angle) |
| सब्सिडी संरचना | • लघु/सीमांत किसान: 55% • अन्य किसान: 45% | वित्तीय समावेशन और छोटे जोत वाले किसानों की पहुंच सुनिश्चित करना। |
| भौतिक सीमा | प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर | बड़े भूस्वामियों द्वारा सब्सिडी के एकाधिकार को रोकना। |
| पुनरावृत्ति चक्र | एक ही भूमि हेतु 7 वर्ष बाद पुनः सहायता | उपकरणों की कार्यशील अवधि (Life Cycle) और तकनीकी नवीनीकरण। |
| अन्य हस्तक्षेप (Other Interventions) | डिग्गी (जल भंडारण टैंक), खेत-तालाब और सामुदायिक संचयन संरचनाएं | पूर्व में लागू 20% व 40% की वित्तीय सीमा समाप्त; राज्यों को स्थानीय भौगोलिक मांग के अनुसार खर्च करने की स्वायत्तता। |
| फर्टिगेशन (Fertigation) | सिंचाई जल के साथ घुलनशील उर्वरकों (NPK) का मिश्रण | लीचिंग (Leaching) में कमी, भूजल प्रदूषण की रोकथाम, पोषक तत्व दक्षता में 30% तक सुधार। |
4. UPSC एवं UPPSC विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs) - विस्तृत व्याख्या सहित
भाग A: प्रारंभिक परीक्षा (Prelims PYQs)
[UPSC CSE Prelims 2015]
प्रश्न: भारत में सिंचाई के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
देश में कुल सिंचित क्षेत्र का अधिकांश भाग नहरों द्वारा सिंचित है।
सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई प्रणाली से मृदा की लवणता पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (d)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है: भारत में शुद्ध सिंचित क्षेत्र का 60% से अधिक हिस्सा नलकूपों और कुओं (भूजल) द्वारा सिंचित है, न कि नहरों द्वारा। नहरों का हिस्सा लगभग 24-26% है।
कथन 2 गलत है: ड्रिप सिंचाई जल दक्षता बढ़ाती है, लेकिन यह मृदा लवणता को पूरी तरह "समाप्त" नहीं करती। बल्कि, कम जल अनुप्रयोग के कारण लवण जड़-क्षेत्र की परिधि पर जमा (Salt accumulation at the wetting front) हो सकते हैं, जिसके लिए समय-समय पर लीचिंग की आवश्यकता होती है।
[UPSC CSE Prelims 2016]
प्रश्न: ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) पद्धति के प्रयोग के क्या लाभ हैं?
खरपतवार (Weed) में कमी
मृदा लवणता (Soil Salinity) में कमी
मृदा अपरदन (Soil Erosion) में कमी
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: ड्रिप सिंचाई से पानी केवल मुख्य पौधे की जड़ को मिलता है। अंतरालों (Inter-row space) की मिट्टी सूखी रहने के कारण अवांछित खरपतवार नहीं उगते।
कथन 2 गलत है: ड्रिप सिंचाई लवणीय जल के उपयोग की अनुमति देती है परंतु यह मृदा लवणता को कम नहीं करती।
कथन 3 सही है: चूंकि पानी बूंद-बूंद गिरता है और सतही बहाव (Runoff) शून्य होता है, इसलिए पानी के तेज बहाव से होने वाला मृदा अपरदन रुक जाता है।
[UPSC CSE Prelims 2020]
प्रश्न: कृषि में फर्टिगेशन (Fertigation) के क्या लाभ हैं?
सिंचाई जल की क्षारीयता का नियंत्रण संभव है।
रॉक फॉस्फेट और अन्य सभी फॉस्फेटिक उर्वरकों का कुशलतापूर्वक अनुप्रयोग संभव है।
पौधों के लिए पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि होती है।
रासायनिक पोषकों के निक्षालन (Leaching) में कमी संभव है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 1, 2 और 4
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4
उत्तर: (c)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: फर्टिगेशन में अम्लीय यौगिकों को मिलाकर जल का pH मान और क्षारीयता नियंत्रित की जा सकती है।
कथन 2 गलत है: रॉक फॉस्फेट पानी में अघुलनशील (Insoluble) होता है। ड्रिप तंत्र में केवल पूर्णतः घुलनशील उर्वरकों (Liquid/Water Soluble Fertilizers) का ही प्रयोग हो सकता है, अन्यथा ड्रिपर्स चोक (Choke) हो जाते हैं।
कथन 3 व 4 सही हैं: पोषक तत्व सीधे जड़ को मिलते हैं, जिससे पौधे तेजी से अवशोषित करते हैं और उर्वरक वर्षा के पानी के साथ रिसकर भूजल में नहीं जाते (कम लीचिंग)।
[UPPSC Prelims 2018]
प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-सी सिंचाई प्रणाली ढलानदार (Undulating) एवं रेतीली मृदा वाले क्षेत्रों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है?
(a) प्रवाह सिंचाई (Flow irrigation)
(b) ड्रिप सिंचाई (Drip irrigation)
(c) स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई (Sprinkler irrigation)
(d) कुआं सिंचाई (Well irrigation)
उत्तर: (c)
व्याख्या: स्प्रिंकलर प्रणाली में भूमि के समतलीकरण (Land leveling) की आवश्यकता नहीं होती। यह कृत्रिम वर्षा की तरह कार्य करती है, जिससे ढलानदार और रेतीली भूमि (जहाँ जल अवशोषण दर बहुत अधिक होती है) पर बिना अपवाह के समान सिंचाई संभव होती है।
[UPPSC Prelims 2021]
प्रश्न: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के संदर्भ में 'हर खेत को पानी' और 'प्रति बूंद अधिक फसल' क्रमशः किन मंत्रालयों/विभागों द्वारा मुख्य रूप से समन्वित किए जाते हैं?
(a) जल शक्ति मंत्रालय एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
(b) ग्रामीण विकास मंत्रालय एवं नीति आयोग
(c) पर्यावरण मंत्रालय एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
(d) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं कृषि मंत्रालय
उत्तर: (a)
व्याख्या: PMKSY के विभिन्न घटकों का कार्यान्वयन अंतर-मंत्रालयी है:
AIBP एवं हर खेत को पानी: जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti)
प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC): कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (MoA&FW)
वाटरशेड विकास (Watershed Development): भूमि संसाधन विभाग / ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD)
भाग B: मुख्य परीक्षा (Mains Questions & Model Structures)
[UPSC GS Paper III - Mains 2017 Model Question]
प्रश्न: "जल उपयोग दक्षता (WUE) से आप क्या समझते हैं? सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली भारत में घटते भूजल स्तर और कृषक संकट को किस सीमा तक हल कर सकती है?" (15 अंक / 250 शब्द)
उत्तर संरचना (Framework):
प्रस्तावना (Introduction): जल उपयोग दक्षता (WUE) को परिभाषित करें $\left(\text{WUE} = \frac{\text{फसल उत्पादन}}{\text{प्रयुक्त जल की मात्रा}}\right)$। भारत में कृषि द्वारा 80% जल उपभोग के बावजूद कम दक्षता का उल्लेख करें।
भूजल संकट के समाधान में भूमिका:
पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अति-दोहित (Over-exploited) एक्विफर्स का पुनर्भरण।
ऊर्जा खपत में 10-17% कमी (पंपिंग समय घटने से)।
कृषक संकट (Agrarian Crisis) का समाधान:
लागत में कमी: उर्वरक बचत (11-19%) और श्रम लागत में 30-40% की कमी।
उत्पादकता एवं विविधीकरण: बागवानी फसलों (High-value crops) को बढ़ावा, जिससे शुद्ध आय में 10-69% की वृद्धि।
सीमाएं/चुनौतियां: उच्च प्रारंभिक पूंजीगत लागत, बिजली की अनियमित आपूर्ति, ड्रिपर्स का चोकिंग, राज्यों में सब्सिडी वितरण में देरी।
निष्कर्ष (Conclusion): PM-RKVY के लचीलेपन और सौर पंपों (PM-KUSUM) के साथ एकीकरण से 'जल सुरक्षा से खाद्य सुरक्षा' का मार्ग प्रशस्त करना।
[UPPSC GS Paper III - Mains 2022/2023 Focused Question]
प्रश्न: "उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्रों में सूखे की पुनरावृत्ति को नियंत्रित करने में 'प्रति बूंद अधिक फसल' (PDMC) योजना के तहत 'डिग्गी एवं खेत-तालाब' निर्माण की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।" (12 अंक / 200 शब्द)
उत्तर संरचना (Framework):
संदर्भ (Context): बुंदेलखंड की कठोर चट्टानी भूगर्भीय संरचना (Hard rock terrain), जहां भूजल पुनर्भरण कम और सतही अपवाह अधिक होता है।
डिग्गी और खेत-तालाब का रणनीतिक महत्व:
अपवाह जल संचयन (Runoff Harvesting): वर्षा जल को डिग्गी में एकत्र कर जीवन रक्षक सिंचाई (Protective Irrigation) सुनिश्चित करना।
फंडिंग लचीलापन: नए संशोधित नियमों में 20% और 40% की सीमा समाप्त होने से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार भंडारण क्षमता का विस्तार।
कार्यान्वयन चुनौतियाँ: अत्यधिक वाष्पीकरण दर, सिल्ट का जमाव (Siltation), और छोटे किसानों के पास तालाब हेतु भूमि की कमी।
आगे की राह: चेकडैमों के साथ अभिसरण, प्लास्टिक लाइनिंग तकनीक (वाष्पीकरण/रिसाव रोकने हेतु), और सामुदायिक जल पंचायत मॉडल।
5. विश्लेषणात्मक चुनौतियाँ एवं भावी नीतिगत सुझाव (Way Forward)
ऊर्जा-जल गठजोड़ (Energy-Water Nexus): निःशुल्क या अत्यधिक रियायती बिजली के कारण किसान अक्सर ड्रिप प्रणालियों के बावजूद आवश्यकता से अधिक सिंचाई करते हैं (Jevons Paradox)। इसे स्मार्ट ऑटोमेशन व सॉयल मॉइस्चर सेंसर्स (IoT) से जोड़ना अनिवार्य है।
फर्टिगेशन हेतु जल-घुलनशील उर्वरकों (WSF) की उपलब्धता: भारत में पारंपरिक यूरिया और डीएपी सस्ते हैं, जबकि घुलनशील उर्वरक महंगे हैं। WSF पर सब्सिडी नीति को युक्तिसंगत बनाना आवश्यक है।
डिजिटल निगरानी (Geotagging & Aadhaar Integration): बुनियादी ढांचे की भौतिक स्थापना और वास्तविक संचालन की पुष्टि के लिए जियो-टैगिंग और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की निगरानी को सुदृढ़ किया गया है।
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